गीतिका/ग़ज़ल *हमीद कानपुरी 14/09/202514/09/2025 हिन्दी नया परचम उठाना चाहती है।नये जलवे दिखाना चाहती है। फ़ज़ा अच्छी बनाना चाहती है।सभी को साथ लाना चाहती है। पुराना Read More
गीतिका/ग़ज़ल *हमीद कानपुरी 11/09/202511/09/2025 ग़ज़ल कुछ नहीं वाहियात कहते हैंबे झिझक अपनी बात कहते हैं झूठ को बे नक़ाब हैं करतेसच सभी वाकयात कहते हैं Read More
गीतिका/ग़ज़ल *हमीद कानपुरी 23/08/202523/08/2025 ग़ज़ल अब न होंगी उतार की बातें।सिर्फ़ होंगी उभार की बातें। तिफ्लकी बातकरचुके जीभरअब करो शह सवार की बातें थक गये Read More
गीतिका/ग़ज़ल *हमीद कानपुरी 18/08/202518/08/2025 ग़ज़ल जिनके दिल में उल्फ़त उल्फतकैसे कर सकते हैं नफरत उनसे कब हो सकता सहमतहर सू जो बाँटे हैं नफरत जिसको Read More
गीतिका/ग़ज़ल *हमीद कानपुरी 22/07/202522/07/2025 ग़ज़ल अनवरत दे रहा सदा यूँ ही।राह चलते मुझे मिला यूँ ही। चाहता हूँ उसे दिलो जां से,उससे रिश्ता नहीं बना Read More
गीतिका/ग़ज़ल *हमीद कानपुरी 21/07/202521/07/2025 ग़ज़ल खूब कसमें बड़ी वो खाएगा।भूल कर सच नहीं बताएगा। देर तक दूर तक घुमाएगा।बात कोई न पर बताएगा। रूठने को Read More
मुक्तक/दोहा *हमीद कानपुरी 10/07/202529/07/2025 हमीद कानपुरी के दोहे मुश्किल से तेरी नहीं, हरगिज़ रब अंजान।हर मुश्किल तेरा ख़ुदा, करता है आसान। मैं को अब पीछे करें, हम कर Read More
गीतिका/ग़ज़ल *हमीद कानपुरी 25/06/202525/06/2025 ग़ज़ल ग़मों से दूर जाना चाहता है।बशर अब मुस्कुराना चाहता है। नहीं रोना रुलाना चाहता है।समय हँसकर बिताना चाहता है। नया Read More
गीतिका/ग़ज़ल *हमीद कानपुरी 01/06/202501/06/2025 ग़ज़ल सोच के साथ जब अमल आया।खुद ब खुद रास्ता निकल आया। सूर्य उल्फ़त काजबनिकल आया।मोम सा आदमी पिघल आया। काम Read More
गीतिका/ग़ज़ल *हमीद कानपुरी 10/05/202510/05/2025 ग़ज़ल जो यक़ी उसका खोता नहीं है।नाव रब फिर डुबोता नहीं है। रौशनी दो मुझे या मुहम्मद,तीरगी दिल ये ढोता नहीं Read More