कविता कामनी गुप्ता 08/04/2017 मन ! मन.. मरुस्थल सा लगता मन सहमी सहमी सी ज़िन्दगी कितने उतार और चढ़ाव कभी कोई आस जगती फिर तूफ़ान औ Read More
गीतिका/ग़ज़ल कामनी गुप्ता 06/04/2017 ग़ज़ल राहें जुदा हुई जो अब गुज़र हो कैसे। ताउम्र रहे तड़पते अब बसर हो कैसे। तुम बिन जीने की आदत Read More
हाइकु/सेदोका कामनी गुप्ता 01/04/2017 हाइकू ! १. अंसतुलन प्रकृति का प्रकोप समझो अब ! २. ये प्रदूषण हरियाली सिमटे पेड़ बचाओ ! ३. क्यूं रुढ़िवाद करे Read More
कविता कामनी गुप्ता 21/03/2017 पेड़ ! पेड़ ! देखे मानव ग्रीष्म में तलाशते हम पेड़ों को बचते भटकते देने मात लू के थपेड़ों को पर मानव Read More
कविता कामनी गुप्ता 17/03/2017 कह दो ! कभी थमती कभी उभरती ह्रदय की उन भर्मित धड़कनो ने छेड़ा है फिर मधुर अहसास जो कहता है बार बार Read More
मुक्तक/दोहा कामनी गुप्ता 17/03/2017 गुमनाम ! क्यूं एक दिन वो गुमनाम हो जाता है पल पल अपना जो संघर्ष में बिताता है करके न्योछावर अपना सारा Read More
भजन/भावगीत कामनी गुप्ता 17/03/2017 कान्हा मन में बसी श्याम की मनमोहक काया। सजे अधर पे बंसी सुर मधुर सजाया। भूली सब काम-धाम मैं देखो सखियो; Read More
बाल कविता कामनी गुप्ता 09/03/2017 देखो ना ! देखो ना समय कैसा आया है। सबको भेड़ चाल ने बहकाया है। ममी कहती डाक्टर बन जाओ; जाने दिल में Read More
हास्य व्यंग्य कामनी गुप्ता 08/03/2017 चुनाव हैं भैया ! मंत्री जी बहुत ही जल्दी में दिख रहे थे, शायद कपड़ों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया था। इसिलिए साधारण घर Read More
कविता कामनी गुप्ता 19/02/201719/02/2017 होली होली रंगों का हंसी मौसम लाती तो है। थोड़ी ही सही हर दिल को भाती तो है। वे जो कहीं Read More