पत्थर हूँ मैं
इंसान नज़र आता बंजर हूँ मैंठोकरों से देखो बना पत्थर हूँ मैं टूटे एहसास,टूटे ख्वाब-ख्वाहिशेंमेरी खुशियों के महल , इमारतेंतिरस्कार
Read Moreइंसान नज़र आता बंजर हूँ मैंठोकरों से देखो बना पत्थर हूँ मैं टूटे एहसास,टूटे ख्वाब-ख्वाहिशेंमेरी खुशियों के महल , इमारतेंतिरस्कार
Read Moreनहीं थकते नहीं रुकते,संघर्ष ही जीवन है कहते।हर उम्र में इक अलग रूप,न छांव न देखें कभी धूप।चलते समय संग
Read Moreक्यों करते हो इंतज़ार दहलीज़ पर साथीछोड़ दो पुरानी बातें अब ये काम नहीं आतीजानते हो आजकल चिट्ठियां नहीं आती।
Read Moreकहीं अपनी ही परछाई में,हाँ ! ढूँढ लेना मुझे तन्हाई में वक्त मिले जब सपनों से,मिलना चाहो अपनों से,भले दूर
Read Moreसब पाकर भी न घमंड होना।सबसे कठिन है सरल होना ।हम जिस कुर्सी पे बैठे आज,कल होगी जाने किसकी जान।
Read Moreरिटायरमेंट के बाद थोड़ा असहज सा खुद को पाता हूँ।सब रिश्ते तो वही हैं,पर जाने क्यों मैं हिचकिचाता हूँ। कोशिश
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