झूठा सच !
ममा ममा! कहता हुआ छोटा सा आदित्य रसोईघर में भाग भाग कर हांफता हुआ गिरता,संभलता आकर छुप गया था। छवि
Read Moreहंसते खेलते बंटी के बचपन पर तो जैसे कभी खत्म न होने वाले दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। पिता
Read Moreआधुनिक नारी आधुनिक नारी यह तो है सब पे भारी। कोई न पाए पार ऐसी इसमें होशियारी। जीवन इसका व्यस्त
Read Moreसरहदों को सुरक्षित रखता रहा। खुद को यूंही समर्पित करता रहा। भेद नहीं आता जाति पंथ का सबको बस इन्सान
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