मुक्तक
सपने कभी नभ छूलें ,कहीं मन भ्रमाए! समझे न मन को कोई ,क्या खेल दिखाए! संसार की माया छले,कभी भटके
Read Moreज्ञान का उजियारा फैलाया! भारत का भगवा फहराया! देश का अपने गौरव बड़ाया! ज्ञान का दीप ऐसा जलाया! भूल न
Read Moreमाना मुट्ठी से रेत की तरह फिसलता जाता है यह वक्त ! चाहकर भी कोई नहीं वापिस पा सकता है
Read More