प्रकृति प्रेमी
बस पेड़ गुंगे थे पर प्राण विहीन नहीं,प्रकृति कर रही थी पुकार बस अपनी मौन भाषा मेंऔर वही समझ पा
Read Moreबस पेड़ गुंगे थे पर प्राण विहीन नहीं,प्रकृति कर रही थी पुकार बस अपनी मौन भाषा मेंऔर वही समझ पा
Read Moreसुबह-सुबह की गुलाबी ठंड मेंएक आदिवासी बालिकामीठे रसीलेमहुओं के फूलों को बीन रही थी।अपने सपनों के परों को वह खोल
Read Moreविश्वरत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 14 अप्रैल 2025 को विश्व, उनकी 135वीं जयंती मनाने जा रहा है। जीवन भर समता
Read Moreहिंदी बहु संख्यकों की बोली है ।सब जनों के मन में पलने दो।है उदार जग-जन के मन में यहसबको गले
Read Moreसुंदर सपनों की परिभाषा है हिंदी।देश के भविष्य की आशा है हिंदी।हम सबकी अभिलाष है हिंदी।यह अपनों की भाषा है
Read Moreकितने जख्मों को पाला सीने में, बस जीता जा रहा हूं मैं।कितने दुःख दर्द हो सीने में, मगर हंसता जा
Read Moreतुझको ऐ वतन करते हैं नमनतेरी अनुपम छटा का,नहीं है यहां पर तोल ,हर कोई दिल थाम के,बोले प्रेम के
Read Moreभीनी -भीनी गंध है। मस्त बयार के संग है फूलो की सुगंध में झुलता बसंती रंग है। कवियों को देखो
Read Moreआज दुनिया की आधी आबादी महिलाओं की है। राष्ट्र के निर्माण में महिलाओं की अहम भूमिका है। आज महिलाएं शिक्षा,
Read Moreभाषा मानव सभ्यता की जननी है। भाषा के बिना मानव अधुरा है। भाषा के बिना मानव का विकास संभव नहीं
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