डूबी सच नैया
सच नैया खेते रहे ,झूठ नदी पर यार,सच चप्पू करता रहा ,झूठ लहर से प्यार ,झूठ लहर से प्यार ,पवन
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Read Moreदुनिया सारी झूठ है ,झूठ सारा जहान,झूठ को सत्य मान ले,इसमें तेरी शान। —सच का इक दीपक जला,झूठ हुआ बेहाल,पर
Read Moreजंगल मे चलने लगी,अब चुनाव की चाल ,झट से ओढ़ी शेर ने ,सज्जनता की खाल, सज्जनता की खाल, हुई बकरी
Read Moreजख्म दिया है दवा भी दे दो ,उनके हक की हवा भी दे दो। आटा चावल संग सेवक जी ,एक
Read Moreअपनों से मुख मत मोड़ो ,जीवन का हर दुख छोड़ो। पेड़ जो दे शीतल छांह ,मत काटो उसे निगोड़ों। गरमी
Read Moreसरकारी सेवा निवृत अधिकारी रामलाल का बाई पास सर्जेरी होना था .पढ़े लिखे बेटे हिसाब लगा रहे थे .इलाज में
Read Moreसारे बच्चे आठ से तेरह वर्ष के थे। सभी उत्साह से काम कर रहे थे , फिर वे काम क्यों
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