वो रेशम ही थी
शहर की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी, ऊंची इमारतें और मसनूई रोशनियां कभी कभार इंसान को अंदर से बिल्कुल ख़ाली कर देती
Read Moreशहर की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी, ऊंची इमारतें और मसनूई रोशनियां कभी कभार इंसान को अंदर से बिल्कुल ख़ाली कर देती
Read Moreउस बड़े से पुश्तैनी ज़मीन की में अगर किसी का पसीना और त्याग छुपा था, तो वह सिर्फ़ बड़ा भाई
Read Moreपहाड़ों की ओट से जब सूरज की पहली किरन निकलती, तो वादी-ए-चिनार सुर्ख़ सुनहरी रोशनी में नहा जाती। इसी वादी
Read Moreनहरे फ़रात नहीं तुझ सा कोई बद नसीब, साहिल पे तेरे प्यासा था कुनबा हुसैन का। या हुसैन! कर्बला की
Read Moreवह चौबीस साल की उम्र का अलबेलापन था, जब जिंदगी सिर्फ स्कूल के ब्लैक बोर्ड, चाक की धूल और चंद
Read Moreढलती शाम का सफ़रसांझ ढली है, सूरज लाल,पेड़ों के पीछे छुपा गुलाल।कच्ची सड़क पर उड़ती धूल,घर लौट रहे हैं सब
Read Moreयह सवाल किसी भी संजीदा और संवेदनशील क़लमकार के आत्म-मंथन का सबसे बुनियादी और गहरा बिंदु है कि हम आख़िर
Read Moreसंसार में यदि आपको अपनी एक अमिट, विशिष्ट और सम्मानित पहचान स्थापित करनी है, तो आपको दूसरों के प्रभाव, रसूख
Read Moreशाम के साए ज़रा गहरे हो चुके थे। रेलवे स्टेशन के मुसाफ़िरख़ाने में बत्तियों की मद्धम रोशनी फैली हुई थी।
Read Moreसृष्टि के आदि से प्रवाहित, देवभूमि की अमर कहानी है,शिव के आदियोग से उपजी, यह पावन ज्ञान-त्रिवेणी है। सिंधु घाटी
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