तो गज़ल मैं लिखूं,
आए माहज़बी मेरे रूबरू कोई तो गजल मैं लिखूँ,गहराईयों को दिल की मेरे कोई छू ले तो गजल मैं लिखूँ,पी
Read Moreआए माहज़बी मेरे रूबरू कोई तो गजल मैं लिखूँ,गहराईयों को दिल की मेरे कोई छू ले तो गजल मैं लिखूँ,पी
Read Moreकश्मीर की वादियों में बसा एक छोटा-सा गांव, जहां झील की सतह पर उतरती चांदनी और पहाड़ों की खामोशी में
Read Moreजून की तपती दोपहर, शादी के सातवें दिन ही आदित्य को पुणे बी.एड ट्रेनिंग के लिए निकलना पड़ा। नए शहर
Read Moreबेटी जिगर का टुकड़ा है,बेटियां माता-पिता के दिल के बेहद क़रीब होती हैं, उनकी परवरिश में प्यार और सुरक्षा दोनों
Read Moreअमलतास का पेड़, एक सुंदर और औषधीय वृक्ष है, जिसे आमतौर पर सड़कों के किनारे, बाग-बगीचों और पार्कों में लगाया
Read Moreतेरा ही ख्वाब है, दूजी कोई तलब नहीं।मेरे हमसफ़र, तेरी याद है, तेरी याद है। आँखों में कई ख्वाब हैं,
Read Moreकश्मीर की हसीन वादियों में एक छोटा सा गाँव था, जहाँ हर तरफ हरियाली और फिजाओं में भीनी-भीनी खुशबू बसी
Read Moreअली और ज़ैनब, दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते थे। क्लास के बाद अक्सर लाइब्रेरी के एक शांत कोने में
Read Moreधूप की चादर, सर्द हवाओं का आलम,ख़ामोश लम्हे, पिघलती उम्मीदें,बिखरी मुस्कान, आँखों में ठहरा पानी। यादों की परछाईं, मोहब्बत की
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