बसन्त
कोयल की कूक गूंजती आया बसन्त है। पवन चले मतवाली सी आया बसन्त है। सरसों फूले नहीं समाए हैआया बसंत
Read Moreप्यारा महीना फ़ागुन का सुंदर और सलोना है। सबके हृदय में आनंद और उल्लास जगाता है। धन-धान्य से परिपूर्ण,मन उद्वेलित हो जाता
Read Moreहोली के लोक गीत गूंजते , सुनलो सुनलो मधुर मधुर , मकरंद की आवाज़, आया वसंत फिर झूम झूम के
Read Moreतुम्हारी ज़ुल्फ़ों की हंसी शाम किस तरह भुलुं। पहली नज़र ही आपकी उफ़ मैं किस तरह भुलुं। शौक था के
Read Moreयोगा एक पुराना फन है , हुनर है, वादिए शिंद की (सभ्यता) तहजीब की तलाश में एक खुदाई के दौरान
Read Moreउससे मुस्कुरा के हीे मिलना है। मेरी आंखों,में मगर नमी सी है। दिल डरता है ,ख़फ़ा न हो जाये। इज़हारे
Read Moreउसको यक़ीन कितना था वक़्ते जुदाई मुस्कुरा कर कह गया वो शख़्स मिलेंगें फ़िर कभी, अजनबी तो था, दो पल
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