ख़ानदान
एक घर में देखो कई मकान दिखते हैं बिखरे हुए से रिश्तों के निशान दिखते हैं कहने को हर क़दम
Read Moreकविता को कविता के दिन दें कविता का उपहार हर बात को कविता के लहज़े में कह डालें हर बार
Read Moreपी से अनुराग होने लगा धड़कन में राग होने लगा बिन सावन बिन चैत सखी जीवन में फाग होने लगा
Read Moreतुम जितना मुझको रोकोगे मैं उतना बढ़ती जाऊँगी तुम पैर पकड़ कर खींचोगे, मैं ऊपर चढ़ती जाऊँगी पढ़ते पढ़ते ही
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