गुज़ारिश
है तपिश बड़ी कुछ बारिश चाहिए थोड़ी राहत भरी गुंजाइश चाहिए रीत गए ख़्वाब-ओ-अरमान सारे मन को भिगोये वो ख़्वाहिश
Read Moreकविता को कविता के दिन दें कविता का उपहार हर बात को कविता के लहज़े में कह डालें हर बार
Read Moreपी से अनुराग होने लगा धड़कन में राग होने लगा बिन सावन बिन चैत सखी जीवन में फाग होने लगा
Read Moreतुम जितना मुझको रोकोगे मैं उतना बढ़ती जाऊँगी तुम पैर पकड़ कर खींचोगे, मैं ऊपर चढ़ती जाऊँगी पढ़ते पढ़ते ही
Read Moreबेड़ियां सब तोड़कर स्वप्न पराधीन छोड़कर कर फतह हर एक किला तू बांध ले सर पर कफन जो शहीद हुआ
Read Moreहिमवान मेरे सिर का गौरव नित सिंधु चरण पखारे है उत्तर से दक्षिण तक देखो कैसे प्रकृति मुझे सँवारे है
Read Moreगुरु जो जीने के गुर सिखाए आत्मविश्वास की लौ जगाए भूलें हम जब लक्ष्य की राह वो मार्ग सब प्रशस्त
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