शिक्षा का बाज़ार और कोचिंग पर बढ़ती निर्भरता
जब विद्यालय शिक्षण का केंद्र नहीं रहते, तो शिक्षा व्यापार बन जाती है। हर तीसरा स्कूली छात्र प्राइवेट कोचिंग ले
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Read Moreलोकतंत्र में असहमति और आलोचना आवश्यक हैं, लेकिन जब यह अभद्रता और घृणा का रूप ले लेती है, तो समाज
Read Moreदादा गौतम उर्फ़ हरियाणा के विधायक रामकुमार गौतम द्वारा विधानसभा में उठाया गया मुद्दा केवल विवाह की सहमति भर का
Read Moreसोशल मीडिया की चमक-दमक के शोर में किताबों का स्वर कहीं खो गया है। इंस्टाग्राम और डिजिटल मीडिया का दौर
Read Moreसमर्पण, सेवा और संगठन की सौ वर्षीय यात्रा से विश्वगुरु भारत की ओर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष केवल
Read Moreहर चौथा पद खाली: पशु चिकित्सकों की कमी से जूझता भारत, ग्रामीण पशुपालन पर संकट और किसानों की आय पर
Read Moreजब फ़ोन और फ़ीलिंग्सदोनों मौन हो जाएँ,तब आत्मा का सूना आँगनआँखों की ओस से भर जाता है। ज्ञान की दीवारेंकितनी
Read Moreआज शिक्षा केवल अंक और नौकरी तक सीमित हो गई है। नैतिक मूल्य और संस्कार बच्चों की प्राथमिकता से गायब
Read Moreझूठे मुकदमे केवल निर्दोषों को पीड़ा नहीं देते, बल्कि न्याय तंत्र की नींव को भी हिला देते हैं। जब वकील
Read Moreभारतीय चुनाव आयोग कभी लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव माना जाता था। लेकिन हालिया वर्षों में उसकी निष्पक्षता और पारदर्शिता
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