जब बचपन चाकू उठाने लगे
छोटे-छोटे हाथों में, अब गेंद नहीं, किताब नहीं,चाकू है, गुस्सा है, आंखों में अब ख्वाब नहीं।न शरारत की हँसी बची,
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Read Moreस्कूली छात्रों द्वारा चाकू से हमले की घटनाएं बता रही हैं कि बच्चों की मासूमियत में अब गुस्सा, हिंसा और
Read Moreशहरों की भीड़ में रहते हुए हम जैसे संवेदना शून्य होते चले जाते हैं। वहां सुबह मोबाइल अलार्म से होती
Read Moreमहाराणा प्रताप केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि भारतीय आत्मगौरव के प्रतीक थे। जब सारे राजपूत मुग़ल दरबार में झुक गए,
Read Moreआखिरकार छोड़कर तो सब कुछ यहीं जाना है। ऐसे में यदि किसी जरूरतमंद अपने की सहायता कर दी जाए, तो
Read Moreन था मुक़दमा, न कोई फ़रमान,किया व्हाट्सएप ने अकाउंट निष्क्रिय बेजुबान।जैसे राजा बोले – “चुप रहो!”और प्रजा हो जाए संतान-सा
Read Moreजब सोशल मीडिया हमारे जीवन में आया, तो उम्मीद थी कि यह विचारों को जोड़ने, संवाद को मज़बूत करने और
Read Moreसमाज में अब बेटी की निगरानी नहीं, दादी और सास की होती है। तकनीक और आज़ादी के इस युग में
Read Moreहिसार/ भिवानी/फरीदाबाद, हरियाणा | 25 मई 2025: देवर्षि नारद जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित राज्य स्तरीय पत्रकार सम्मान समारोह में
Read Moreभारतीय लोकतंत्र का मूल मंत्र है – समान अवसर। लेकिन जब अवसरों की तुलना में विशेष सुविधाएं या बोनस अंक
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