Author: *डॉ. प्रियंका सौरभ

सामाजिक

गड्ढों, खुले मैनहोल और टूटी सड़कों के बीच जीवन – नागरिक कब सुरक्षित होंगे?

मृत्यु कब, कहाँ और कैसे आएगी, यह अज्ञात है। हमारे जीवन में, जो सामान्य सी बात लगती है, वैसे ही

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बाल कविता

नन्ही मुस्कान

नन्हे हाथों में सजे,सपनों के संसार।पापा संग मुस्कान यह,करती मन गुलज़ार॥ नटखट आँखें बोलतीं,भोले-भोले बोल।इनकी प्यारी शरारतें,मन में भरतीं घोल॥

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