हरियाली तीज : सावन की पुकार
सावन आया द्वार पर, भीगी मन की पीर।सूनी पलकों में बसी, प्रियतम की तस्वीर॥ झूला सूना डाल पर, सूनी है
Read Moreसावन आया द्वार पर, भीगी मन की पीर।सूनी पलकों में बसी, प्रियतम की तस्वीर॥ झूला सूना डाल पर, सूनी है
Read Moreसावन में है तीज का, एक अलग उल्लास |प्रेम रंग में भीग कर, कहती जीवन खास | | जैसे सावन
Read Moreकलम उठी तो दर्द ने, खोले अपने द्वार।मन में दबे सवाल सब, बनकर निकले प्यार॥ स्याही केवल स्याह है, भीतर
Read Moreकभी सलोना ख्वाब जब, जाता यूँ ही टूट।मन का पंछी मौन हो, जाता पल में रूठ॥ आसों के पंखों तले,
Read Moreछपे हुए पन्ने एक किताब से बढ़कर कुछ नहीं होते। ये लेखक के विचार, अनुभव, भावनाएँ, कल्पना और वर्षों की
Read Moreमैं से हम तक चल पड़े, बदले मन के भाव।मिल-जुलकर जब बाँट लें, आधा हो हर घाव॥ मैं की सीमा
Read Moreबारिश आई गाँव की, भीग उठे अरमान।बूँद-बूँद में खिल उठा, बचपन का सम्मान॥ खिड़की पर बरसात ने, लिख दी नई
Read Moreसरकारी स्कूल हैं, शिक्षा की पहचान।स्कूल बचेंगे तो बचे, संस्कार और ज्ञान॥ माटी की खुशबू लिए, खिलते नन्हे फूल।भारत का
Read More“गाँव की हर चीज़ चाहिए, लेकिन गाँव नहीं चाहिए।” यह एक साधारण-सा वाक्य नहीं, बल्कि आधुनिक भारतीय समाज की बदलती
Read Moreचेहरे भोले ओढ़कर, रखते मन में दाँव।भेड़ों में कुछ भेड़िये, घुसकर देते घाव॥ भेड़ों जैसे बीच में, छिपा हुआ शैतान।मौका
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