भीतर का तूफ़ान
फीकी हँसी मुख लिए, भीतर गहरा शोक।हँसते-हँसते जी रहे, मन को कितना रोक॥ पगडंडी की छाँव थी, सड़कों का विस्तार।सुविधाओं
Read Moreफीकी हँसी मुख लिए, भीतर गहरा शोक।हँसते-हँसते जी रहे, मन को कितना रोक॥ पगडंडी की छाँव थी, सड़कों का विस्तार।सुविधाओं
Read Moreनन्हे हाथों की खुशी,भोली-सी मुस्कान।हाथी संग खेला करे,मेरा नन्हा जान॥ पीला-नीला हाथिया,चलता धीरे-धीरे।हँसी बिखेरे आँगना,खुशियाँ घेरे-घिरे॥ धक्का देकर बोलता,“चल रे
Read Moreहर साल श्रावण के पवित्र महीने में, उत्तर भारत की सड़कें केसर से भर जाती हैं, क्योंकि लाखों कांवड़िया कांवड़
Read Moreनन्हे हाथों की खुशी, नभ जितने अरमान।गेंद संग ही खेलता, अपना सारा जहान॥ छत हो, गाड़ी या गली, हर जगह
Read Moreसावन सिर्फ बारिश का मौसम नहीं है, बल्कि जीवन के सभी रूपों का उत्सव है। भारत मानसून के आगमन के
Read Moreमुख पर कितने रंग हैं, भीतर सूना गाँव।सच की पगडंडी मिली, छोड़ गए सब ठाँव॥ सेवा यदि हो नाम की,
Read Moreनन्हे हाथों थामकर,बैठा हँसता लाल।गोदी में लौकी लिए,जैसे हरित विशाल॥ हरा-भरा यह फल कहे,प्रकृति बड़ी महान।इससे मिलकर सीख लो,सादा सुंदर
Read Moreमौन-पथों पर जो चला, पाया अपना ठौर।भीतर जागा जब स्वयं, मिट गए सब छोर॥ हर यात्रा पैरों बिना, चलती मन
Read Moreजंतर-मंतर लोकतांत्रिक भारत का वह सार्वजनिक मंच है जहाँ नागरिक अपनी बात सरकार और समाज तक पहुँचाने के लिए एकत्र
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