छपकर बिकते थे कभी
छपकर बिकते थे कभी, सच के थे अख़बार,अब तो बिककर छप रहे, कलम है शर्मसार॥ सच की कीमत लग गई,
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Read Moreलगता खूब अजीब है, रिश्तों का संसार,अपने ही लटका रहे, गर्दन पर तलवार॥ चेहरों पर मुस्कान है, भीतर गहरा वार,मीठी
Read Moreशादी कोई सत्ता-संघर्ष नहीं, बल्कि दो व्यक्तियों के बीच भरोसे, सम्मान और जिम्मेदारी का रिश्ता है। लेकिन हमारे समाज में
Read Moreपश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की ऐतिहासिक जीत ने न केवल ममता बनर्जी की तृणमूल
Read Moreसमय तुम्हारा जो लगे, करने में श्रृंगार,स्वयं-ज्ञान में लग सके, हो नारी उद्धार॥ हे नारी, पहचान तू, अपने मन का
Read Moreगूंगे थे, अंधे बने, सुनती नहीं पुकार,धृतराष्ट्रों के सामने, गई व्यवस्था हार॥ सत्ता के गलियार में, गूंजे केवल शोर,सत्य यहाँ
Read Moreएक समय था जब बारात का आना केवल एक परिवार का दूसरे परिवार तक पहुँचना नहीं, बल्कि पूरे गाँव का
Read Moreजबलपुर की लहर में, भरी समंदर पीर,ममता का वह रूप था, ईश्वर की तस्वीर॥ क्रुज की उस चीख में, गूँजी
Read Moreआज के समय में पीएचडी (Doctor of Philosophy) को लेकर समाज में अनेक धारणाएँ प्रचलित हैं। कुछ लोग इसे केवल
Read Moreयोगी भोगी हो गए, संत चले बाजार।अबलाएँ मठ-लोक से, रह-रह करें पुकार॥ माटी की मर्याद भी, हुई आज बेहाल,धर्म-ध्वजा के
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