दूर का युद्ध, पास का असर: तेल संकट और भारत की चिंता
तेल के वैश्विक बाजार में आई उथल-पुथल ने भारत के शहरी जीवन और अर्थव्यवस्था के सामने नया संकट खड़ा कर
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Read Moreकभी मानव सभ्यता को खतरा बाहरी प्रदूषणों से था—धुएँ से, प्लास्टिक से, रसायनों से। पर आज सबसे घातक प्रदूषण हमारी
Read Moreलोकतंत्र केवल चुनावों और सत्ता परिवर्तन की औपचारिक प्रक्रिया का नाम नहीं है; यह सम्मान, मर्यादा और संस्थागत गरिमा की
Read Moreकभी-कभी इतिहास के सबसे गहरे प्रश्न एक साधारण-से वाक्य में सिमट जाते हैं। “देना है, तो पाना है” ऐसा ही
Read Moreऊर्जा के मोर्चे पर भारत एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहाँ भविष्य की दिशा तय हो रही है—एक ऐसा
Read Moreभारत का ‘युद्ध-भय’ सिंड्रोम अब किसी मनोवैज्ञानिक शब्दकोश की परिभाषा भर नहीं, बल्कि 21वीं सदी के भारत की आर्थिक नब्ज
Read Moreमहाराष्ट्र के अहिल्यानगर ज़िले का छोटा सा सौंदला गांव इन दिनों देशभर की निगाहों में है—ना किसी बड़ी सरकारी योजना
Read Moreआसमान अभी भी धुंध और धुएँ से भरा था, जब हमारी आँखें टीवी स्क्रीन पर चमकते लाल ब्लॉकों में फँस
Read Moreमध्य पूर्व की धरती आज बारूद नहीं, मानो जलती हुई मानवता की गंध से भर उठी है। अमेरिका, ईरान और
Read Moreक्या हम सच में आगे बढ़ रहे हैं, या आंकड़ों की चमक ने हमारी दृष्टि धुंधली कर दी है? ऊँची
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