बेचारा पापड़
आम आदमी की थाली से गायब हो रहा पापड़ ,मसालेदार से ज्यादा मुनाफेदार हो गया पापड़ । सीधे बाजार से
Read Moreआम आदमी की थाली से गायब हो रहा पापड़ ,मसालेदार से ज्यादा मुनाफेदार हो गया पापड़ । सीधे बाजार से
Read Moreएक विश्वास का धागा जो दूर रहकर हर साल राह देखता रक्षाबंधन की ।दूर बसे,विदेशो में बसे ओर सीमाओं पर
Read Moreघर की बालकनी की खिड़की खोली बाहर का दृश्य देख मुंह से निकल पड़ा – देखो चीकू के पापा कितना
Read Moreशाम हुई थका सूरज पहाड़ो की ओट में करता विश्राम गुलाबी, पीली चादर बादल की ओढ़े पंछियो के कोलाहल से
Read Moreप्यार ऐसा ही होता धड़कन की चाल बढ़ सी जाती जाने क्यों जब तुम सामने से गुजरती आँखों में अजीब
Read Moreप्रेम की पाती लेकर आता था डाकिया पुकारता था नाम मेरा हिरणी सी चपलता लिए कर जाती थी चोखट को
Read Moreभौरे की निंद्रास्थली होती बंद कमल में उठाती है सूरज की पहली किरण देती दस्तक खुल जाती द्वार की तरह
Read Moreआकाश को निहारते मोर सोच रहे , बादल भी इज्जत वाले हो गए बिन बुलाए बरसते नहीं शायद बदल को
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