स्वार्थ की व्यापकता, आवश्यकता व अनिवार्यता
सामान्यतः स्वार्थ को बड़े ही संकीर्ण और नकारात्मक अर्थ में लिया जाता है। स्वार्थ के अन्य पर्यायवाचियों में, खुदगर्ज, मतलबी,
Read Moreसामान्यतः स्वार्थ को बड़े ही संकीर्ण और नकारात्मक अर्थ में लिया जाता है। स्वार्थ के अन्य पर्यायवाचियों में, खुदगर्ज, मतलबी,
Read Moreविकास सर्वाधिक प्रचलित शब्दों में से एक है। हर व्यक्ति विकास की बात करता है। हर परिवार अपना विकास चाहता
Read Moreकरते नहीं, प्रेम का दावा, प्रेम प्रदर्शन नहीं होता है। प्रेमी वह जो करता अर्पण, प्रेम पात्र के हित जीता
Read Moreशिक्षा मानव विकास के लिए आधारभूत आवश्यकता है। इस तथ्य पर सार्वकालिक सर्वसहमति रही है। शिक्षा के आधारभूत सिद्धांतों को
Read Moreकोई हार, कोई जीत नहीं है गले लगाकर, है ठुकराया, यह तो प्रेम की रीत नहीं है। प्रेम मिलन जब
Read Moreनहीं किसी से स्वयं डरो नहीं किसी से प्रेम की चाहत, नहीं किसी से प्रेम करो। नहीं किसी को कभी
Read Moreखुद ही, खुद से प्रेम करो। खुद ही, खुद को समय निकालो, खुद ही खुद के कष्ट हरो। नहीं, प्रेम
Read Moreसम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान से, सम्यक चरित्र जो पाता है। पाकर स्वयं पर विजय वर्धमान, महावीर बन जाता है।। अनंत
Read Moreप्रेम में नहीं भिन्न कुछ होता, एकाकार हो जाते हैं। तन-मन-धन सब मिलकर ही, गीत मिलन के गाते हैं।। तन
Read Moreप्रेम नहीं सबको मिल पाता, सबके ही परिवार न होता।फसल और ही ले जाते हैं, पाता नहीं, जो उसको बोता।।
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