गीत/नवगीत

सभी को हम हैं, मित्र मानते

कण्टक पथ के पथिक हैं हम, खतरों से अठखेली है।
सभी को हम हैं, मित्र मानते, सभी को माने सहेली है।।

साथ में हमने जिसे पुकारा।
हमारे पथ से किया किनारा।
छल, कपट से विश्वास में लेकर,
विश्वासघात का वज्र है मारा।
नहीं साथ कोई आएगा, राह मेरी अलबेली है।
सभी को हम हैं, मित्र मानते, सभी को माने सहेली है।।

नहीं हमारा कोई ठिकाना।
मालुम नहीं, कहाँ है जाना।
साथ में कोई क्यों आएगा?
आता नहीं, स्वार्थ का गाना।
जीवन पथ के सच्चे पथिक हैं, जीवन नहीं पहेली है।
सभी को हम हैं, मित्र मानते, सभी को माने सहेली है।।

हमको घर ना कोई बसाना।
हमको रोज कमाकर खाना।
धन, पद, यश, तुम्हें चाहिए,
हमको पथ ही लगे सुहाना।
कष्टों में पल बड़े हुए हम, मृत्यु से खेला-खेली है।
सभी को हम हैं, मित्र मानते, सभी को माने सहेली है।।

डॉ. संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी

जवाहर नवोदय विद्यालय, मुरादाबाद , में प्राचार्य के रूप में कार्यरत। दस पुस्तकें प्रकाशित। rashtrapremi.com, www.rashtrapremi.in मेरी ई-बुक चिंता छोड़ो-सुख से नाता जोड़ो शिक्षक बनें-जग गढ़ें(करियर केन्द्रित मार्गदर्शिका) आधुनिक संदर्भ में(निबन्ध संग्रह) पापा, मैं तुम्हारे पास आऊंगा प्रेरणा से पराजिता तक(कहानी संग्रह) सफ़लता का राज़ समय की एजेंसी दोहा सहस्रावली(1111 दोहे) बता देंगे जमाने को(काव्य संग्रह) मौत से जिजीविषा तक(काव्य संग्रह) समर्पण(काव्य संग्रह)