मेरा परिचय
सोच रही हूंँ , कैसे तुझसे अपनी पहचान कराऊंँ मैं, कैसे तुझसे आज मिलूंँ मैं, कैसे परिचय करवाऊंँ मैं। खेतों
Read Moreसोच रही हूंँ , कैसे तुझसे अपनी पहचान कराऊंँ मैं, कैसे तुझसे आज मिलूंँ मैं, कैसे परिचय करवाऊंँ मैं। खेतों
Read Moreकिसी का दिया नहीं खाता हूँ अपना परिश्रम स्वयं करता हूँ खेतों में हल और ट्रेक्टर चलाता हूँ धूप में
Read Moreलौट आया फिर से वो ही कोरोना का कहर.. चुनाव और दीपावली बाद फिर जागा मेरा शहर.. सख्ती और कार्यवाही
Read Moreदुनिया की उत्तम किताब है हम , मगर खुद को पढ़ना शेष है। पोथी पढ़-पढ़ थक हारे हैं, बिना मौत
Read Moreशिक्षक का जीवन मुहाल हो गया बद से बदतर सा हाल हो गया । ज्ञान का दीप जलाने वाला गुरु,
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