दर्पण में दरार: कुंडलिया छंदों में समाज का अनछुआ सच
डॉ. सत्यवान सौरभ का काव्य-संग्रह “दर्पण में दरार” हिंदी साहित्य में कुंडलिया छंद का एक सशक्त और समकालीन प्रयोग है।
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Read Moreफॉलो करना केवल सोशल मीडिया पर बटन दबाना नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन की दिशा तय करता है। करोड़ों
Read Moreलोकसभा में ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 को लेकर गहन बहस हुई। सरकार ने इसे समाज में जुए और लत जैसी
Read Moreआखिर क्यूँ ये लहू ज़मीं पे बहाया गया,अबला थी, उसको ज़हर से खिलाया गया। चुप रहे दरिंदे, चुप रही बस्ती,
Read More“मनीषा की हत्या ने हरियाणा की पुलिस और शासन व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। प्राथमिकी दर्ज करने
Read More“आस्था का सच्चा स्वरूप यही है कि हम प्रकृति का सम्मान करें, नहरों को निर्मल रखें और आने वाली पीढ़ियों
Read Moreलेखक की सबसे बड़ी पूँजी उसके शब्द और उसकी स्वतंत्रता है, न कि सत्ता से नज़दीकी की तस्वीरें। प्रभावशाली व्यक्तियों
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Read Moreउन्यासी बरस की कठिन कहानी,मेहनत, संघर्ष और बलिदानी,अब सवाल है — क्यों रुक जाएँ?जब नेतृत्व का समय बुलाए। शक्ति है
Read Moreआज से उन्यासी वर्ष पहले जब आधी रात का समय आया, इतिहास ने करवट ली। अंधकार के गर्भ से एक
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