अग्नि-जाल में बदलते शहरी भवन
भारत आज विश्व के सबसे तेज़ी से शहरीकरण करने वाले देशों में शामिल है। आर्थिक विकास, औद्योगीकरण, सेवा क्षेत्र के
Read Moreभारत आज विश्व के सबसे तेज़ी से शहरीकरण करने वाले देशों में शामिल है। आर्थिक विकास, औद्योगीकरण, सेवा क्षेत्र के
Read Moreबादल है पर बूँद नहीं, कैसी ऋतु की चाल।प्यासे मन की देह पर, सूखा हर इक ताल॥ धरा तड़पती देखिए,
Read Moreसाहित्य किसी राष्ट्र की आत्मा का सबसे निर्मल स्वर है और साहित्यकार उस स्वर के अनथक साधक। वे शब्दों में
Read Moreपत्थर भी अपने चले, अपने ही थे हाथ।फिर कहते निर्दोष हैं, कैसी झूठी बात॥ आग लगाकर बस्तियाँ, करते ऊँची बात।आँसू
Read Moreभारत में मानसून केवल एक ऋतु नहीं है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, कृषि, जल-संसाधनों और जनजीवन की धुरी है। सदियों
Read Moreनन्हे-नन्हे हाथ में, डॉक्टर वाला खेल।हँसकर सबको बाँटता, खुशियों वाली रेल॥ शीशी, सूई, दवा लिए, करता खूब इलाज।भोली-सी मुस्कान में,
Read Moreलखनऊ में हुए हालिया कोचिंग अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। धुएँ से घिरी इमारतें, चीखते-बिलखते
Read Moreएक घुटी-सी चीख है, सरयू तट की बात।बिन अपराधी श्रवण को, मार गया सम्राट॥राजमुकुट के तीर ने, कैसा किया प्रहार।बिन
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