आज के दौर में भगवान महावीर के विचारों की प्रासंगिकता
आज के भौतिकवादी और असहिष्णु समय में भगवान महावीर के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। उन्होंने अहिंसा, सत्य,
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Read Moreबाबा बोले मूत्र पिएँ, पीते श्रद्धावान।मगर दलित का जल बने, छूते ही अपमान॥ नेत्र मूँद कर मानते, बाबा को भगवान।तर्क
Read Moreमीडिया में स्त्रियों की छवि और उससे जुड़ी सनसनीखेज रिपोर्टिंग ने आज गंभीर सवाल पैदा कर दिये है। कुछ घटनाओं
Read Moreकुछ पुरानी तस्वीरें फिर से मुस्कुराईं,वो पहली मुस्कान, वो हल्की सी शरमाहट,जैसे वक्त की किताब फिर से पलट गई। साल
Read Moreखजागुड़ा जैसे जंगलों को शहरीकरण के नाम पर नष्ट किया जा रहा है, जिससे न केवल पेड़, बल्कि वन्यजीव और
Read Moreसूना जब आँगन लगे, बने न कोई बात।सब्र रखो उस वक़्त में, वही बने सौगात॥ धन वैभव जब पास हो,
Read Moreयह फिल्म हरियाणवी सिनेमा के बदलते परिदृश्य को दर्शाती है, जो पारंपरिक कहानियों से आगे बढ़कर नए विषयों को अपनाने
Read Moreसंपादक आमतौर पर अनूठी और मौलिक रचनाएँ चाहते हैं ताकि उनकी पत्रिका की विशिष्टता बनी रहे। दूसरी ओर, लेखकों को
Read Moreशादी एक पवित्र और भावनात्मक अवसर होती है, जिसमें दो परिवारों का मिलन होता है। इस अवसर पर संगीत का
Read Moreस्वार्थ भरी इस भीड़ में, खोए अपने लोग।चाहत की इस दौड़ में, छूट गए सब योग॥ सत्य हुआ अब मौन
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