Author: *डॉ. सत्यवान सौरभ

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

आज के दौर में भगवान महावीर के विचारों की प्रासंगिकता

आज के भौतिकवादी और असहिष्णु समय में भगवान महावीर के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। उन्होंने अहिंसा, सत्य,

Read More
सामाजिक

मीडिया, स्त्री और सनसनी: क्या हम न्याय कर पा रहे हैं?

मीडिया में स्त्रियों की छवि और उससे जुड़ी सनसनीखेज रिपोर्टिंग ने आज गंभीर सवाल पैदा कर दिये है। कुछ घटनाओं

Read More
पर्यावरण

किसी को उजाड़ कर बसे तो क्या बसे : हैदराबाद के जंगलों की चीख

खजागुड़ा जैसे जंगलों को शहरीकरण के नाम पर नष्ट किया जा रहा है, जिससे न केवल पेड़, बल्कि वन्यजीव और

Read More
अन्य लेख

‘बिन तेरे बेचैन’ – हरियाणवी सिनेमा में प्रेम, जुनून और मानसिक उथल-पुथल की अनोखी कहानी*

यह फिल्म हरियाणवी सिनेमा के बदलते परिदृश्य को दर्शाती है, जो पारंपरिक कहानियों से आगे बढ़कर नए विषयों को अपनाने

Read More
भाषा-साहित्य

लेखक की स्वतंत्रता बनाम संपादकीय नीति: बहस के नए आयाम

संपादक आमतौर पर अनूठी और मौलिक रचनाएँ चाहते हैं ताकि उनकी पत्रिका की विशिष्टता बनी रहे। दूसरी ओर, लेखकों को

Read More