Author: डॉ. शैलेश शुक्ला

पर्यावरण

यूं ही नहीं कोई शहर इंदौर हो जाता

मार्च के अंतिम दिनों में जब मुझे साहित्य अकादमी मध्य प्रदेश द्वारा आयोजित साहित्यिक पत्र–पत्रिकाओं के सम्मेलन में भाग लेने

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शिक्षा एवं व्यवसाय

जरूरी और उपयोगी है संपादकीय कर्म की चुनौतियों पर प्रशिक्षण और संपादकों के बीच आपसी विमर्श

समकालीन समय में जब सूचना, संचार और विचारों का प्रवाह अभूतपूर्व गति से हो रहा है, तब संपादकीय कर्म की

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राजनीति

पलट प्रवास से तेज हो सकता है ग्रामीण भारत का विकास

भारत की सामाजिक और आर्थिक संरचना लंबे समय से ग्रामीण आधार पर टिकी रही है, लेकिन औद्योगिकीकरण, शिक्षा और रोजगार

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सामाजिक

अपने सामूहिक दायित्वों से दूर होता समाज : टूटता सामाजिक ताना-बाना और बिखरती भागीदारी

भारतीय समाज की सबसे बड़ी विशेषता सदियों से उसकी सामूहिकता रही है। परिवार, पड़ोस, ग्राम और नगर—हर स्तर पर लोग

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राजनीति

उत्तर प्रदेश के गाँवों की गूँज: प्रगति का पथ और परिवर्तन का प्रकाश

उत्तर प्रदेश की आत्मा इसके गांवों में बसती है और पिछले नौ वर्षों का कालखंड इस सत्य का साक्षी रहा

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राजनीति

जनसंख्या नियंत्रण की आवश्यकता : बढ़ती जनसंख्या के दुष्परिणाम और पारंपरिक भ्रांतियाँ

भारत आज दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन चुका है। 2024 में भारत की जनसंख्या लगभग 145 करोड़

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सामाजिक

ईंट, इमारत और इंसान : बदलते भारत में रियल एस्टेट की बढ़ती बहार

भारत का रियल एस्टेट क्षेत्र आज देश की अर्थव्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण और गतिशील क्षेत्रों में से एक बन चुका

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विज्ञान

मीडिया, मशीन और मनुष्य : कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में भारतीय पत्रकारिता की नई दिशा

भारतीय मीडिया आज एक ऐसे संक्रमण काल से गुजर रहा है जहाँ परंपरागत पत्रकारिता और अत्याधुनिक तकनीक का अभूतपूर्व संगम

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विज्ञानशिक्षा एवं व्यवसाय

छात्रों द्वारा एआई टूल्स का उपयोग: रचनात्मकता का विस्तार या नकल की संस्कृति?

ज्ञान के गगन में जब नवाचार की नयी नक्षत्र-रेखा निखरती है, तब शिक्षा का स्वरूप भी समय के साथ संवरता

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