गजल
रखना संभल के पाँव, पटा धुंध से शहर है। अब आदमी कहाँ रहा, हैवान का कहर है। ये नोंच लेगें
Read Moreतुम ही जानो कितनी सांसें, हमने साथ बिताई है । जीवन की तपती दुपहरिया , देहरी संग छुपाई है। बदरा
Read Moreकोई प्यार करे, कोई नफरत करे, किसी को कहाँ फर्क पड़ता है। सबको निज सफर पर चलना है, ख्याल गलती
Read Moreसुबह की चाय चौकड़ी में एक खास व्यक्ति का इंतजार करते देख मुझे बड़ी अजीब सा लगता ,पर मैं कभी
Read Moreजागो , कब-तक जागोगे , मुर्दों का शहर न होने दो । जिन्दादिली कायम रखो, खुद पर कहर न होने
Read Moreइधर देखो, उधर देखो , चारों तरफ है शोर बहुत । कुछ लोग फेकते हैं पत्थर , जो समझ रहे
Read Moreसड़कों पर है शोर बहुत, पहरेदारी जोर बहुत। लगा रहे आना जाना, कलगीधारी मोर बहुत। सैलाबों सा है इन्सां ,
Read Moreरंगों का त्योहार है यौवन, हंसना- रोना प्यार है यौवन। स्वप्न -लोक में आना-जाना , सफर सलोना यार है यौवन।
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