श्रम साधक का बहे पसीना
श्रम साधक का बहे पसीना।चाहे सुख से वो भी जीना।।करना चाहे सपने पूरे।जो भी अब तक रहे अधूरे।। श्रम साधक
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Read Moreलोभ मोह में उलझा मानव, बनी हुई है पीर।कैसे कोई समझाए इनको, व्यर्थ बहाते नीर।। इस दुनिया की गजब कहानी,
Read Moreआप सभी को बधाइयाँ शुभकामनाएँ हैं क्योंकि आज गंगा दशहरा है इस दिवस की भी औपचारिकता निभाइए।और कुछ तो आप कर नहीं
Read Moreसीखो वृक्षों से अपनापन, जीवन मधुरिम हो मनभावन।।मुस्काते सबके घर आँगन, लगते सबको बड़े सुहावन।। तन मन में हैं स्फूर्ति
Read Moreसुख-दुख तो हैं आते-जाते, जीवन पथ संगीत सुनाते।समझ इसे हम सब कब पाते, बाद बहुत नाहक पछताते।। इसका जीवन खेल
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