कविता

योग दिवस

इक्कीस जून विशेष है। आज योग परिवेश है।।
योग सभी घर-घर पहुँचाओ, व्यर्थ बहाने नहीं बनाओ।।
हर प्राणी जब योग करेगा।भारत तभी निरोग बनेगा।।
काम संग है योग जरूरी।तभी हमारी बातें पूरी।।
रखना हमें तनाव से दूरी। योग सभी के लिए जरूरी।।
स्वस्थ हमें यदि रहना होगा। रिश्ता योग से रखना होगा।।
दवा नहीं योग अपनाओ। कभी चिकित्सक पास न जाओ।।
गाँव-गली अभियान चलाओ।योग ज्योति प्रकाश फैलाओ।।
हर आँगन योग की शाला, हर जीवन तब हो खुशहाला।।
वसुधैव कुटुंबकम का आधार, योग करे सारा संसार।।
योग नहीं कोई मजबूरी।सेहत सबकी बहुत जरूरी।।
सेहत तो हम सबका धन है।योग बड़ा बहुमूल्य रत्न है।।
स्वस्थ जीवन का ये है योग। सबको रहना सदा निरोग।।
बाधाएं जीवन में जितना। पास योग के रहना उतना।।
योग सूत्र दे मधुरिम जीवन। खुशहाली हो आप सजीवन।।

*सुधीर श्रीवास्तव

शिवनगर, इमिलिया गुरूदयाल, बड़गाँव, गोण्डा, उ.प्र.,271002 व्हाट्सएप मो.-8115285921

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