यमराज की राम जी को सलाह
आज रात प्रभु श्रीराम जी
अभी अपने शयनकक्ष में पहुँचे ही थे
कि पीछे से यमराज भी पहुँच गए,
उन्हें देख राम जी चौंक गए और आने का कारण पूछा –
पहले तो यमराज ने प्रभु को साष्टाँग प्रणाम किया
फिर बिना किसी भूमिका का कहने लगा-
प्रभु! मुझे आपसे शिकायत है
लगता है अपने नए निवास में आकर
आप कुछ आलसी हो गए हैं,
बस! इसीलिए कुछ ध्यान भी नहीं दे पा रहे हैं।
आपके इसी निवास क्षेत्र में चंदा चोरी के खेल हो रहे हैं
और आपको कुछ पता ही नहीं चल पा रहे हैं।
क्या आपके गुप्तचर नकारा हो गए हैं,
या वे सब खुद ही इस चोरी-बेईमानी में शामिल हो
अब आपको भी गुमराह कर रहे हैं।
प्रभु! मेरी सलाह मानिए ,
संकोच छोड़कर सबसे पहले अपने लिए
एक दिन का साप्ताहिक अवकाश घोषित कीजिए,
भेष बदलकर राज्य का भ्रमण कीजिए
वास्तविकता से सीधे रुबरू होइए,
कभी-कभी थकावट के बहाने एकांत में आकर
औचक निरीक्षण का विकल्प भी तय कीजिए।
आपके मंदिर परिसर में ही
जब आपके सिपहसालार राजकोष लूट रहे हैं,
आपकी प्रजा के भरोसे का खून कर रहे हैं
और आप हैं कि बस मज़े से सिर्फ दर्शन दे रहे हैं।
पता नहीं कुछ खा पी भी रहे हैं
या उसमें भी संकोच कर भूखे रह रहे हैं।
ये मैं नहीं आपकी प्रजा भी कह रही है,
सच कहूँ तो रो रही है
बस! आपसे कहने का साहस नहीं कर पा रही है।
वैसे यदि आपको ये सब मुश्किल
और मेरा सुझाव औचित्य हीन लग रहा हो
तो फिर दूसरे विकल्प पर विचार कीजिए
पूरे मंदिर परिसर की देख-रेख और
हिसाब-किताब का जिम्मा तत्काल मुझे दे दीजिए,
और आप सिर्फ भक्तों को दर्शन दीजिए,
मुस्कराइए और चैन की नींद सोइए।
विश्वास कीजिए! मैं सब संभाल लूँगा,
हर दिन का रिपोर्ट कार्ड आपको भेजता रहूँगा
चंदा, जेवर तो छोड़िए एक पत्ता भी चोरी नहीं होने दूँगा
अपने दूतों का पहरा लगा दूँगा
अपने यार को अपना सलाहकार बना
सारा पक्का इंतजाम कर लूंगा,
उसके बाद भी यदि कोई दिक्कत मुझे महसूस हुई
तो सीधे आपके पास आ जाया करुँगा।
अब आप विचार करो या क्रोध में आकर
मुझे दंडित कर अपने मन को शांत करो
यह आपका एकदम निजी मसला है
पर चंदा चोरी का मामला सीधे आपके भक्तों से जुड़ा है,
अब फैसला आपको अभी करना है
या फिर थोड़ा समय लेना है,
यह निर्णय आपको चाहे आज या फिर कल में करना है,
पर मेरी क्या अपने भक्तों की भावनाओं का
अटूट सम्मान तो सुरक्षित रखना ही है।
फिलहाल अब मुझे भी आप से विदा लेना है,
क्योंकि ढेर सारा अधूरा काम भी पूरा करना है।
मेरा प्रणाम स्वीकार कर आशीर्वाद दीजिए,
मेरा नियुक्ति पत्र तैयार कर यथाशीघ्र
भिजवाने का गंभीरता से विचार कीजिए,
अपनी जय-जयकार कीजिए,
कम से कम आप भी तो एक बार
मेरे साथ जय श्री राम बोलिए।
