विजय
विजय कोई खिलौना या वस्तु नहींजिसे खरीद कर या हाथ बढ़ाकर ले लिया जाएया किसी से मांग लिया जाए।विजय पाना
Read Moreहर्षानुभव हो रहा हैअपने भारत का चंद्रयानचांद की सतह नापनेचांद की ओर बढ़ चला है,चालीस दिन का है अभियानजय हिन्द
Read Moreआज हम आधुनिकता के रंग में रंगे जा रहे हैंसुख सुविधाओं के गुलाम बनते जा रहे हैंरोटी पानी की कीमत
Read Moreमुझे २७ मार्च “२०२१ को एक कवि सम्मेलन में बतौर संरक्षक जिस शहर जाना था, संयोग से उसी शहर में
Read Moreकलम उठाई है स्याही नेशब्दों की आड़ी तिरछी रेखाएं खींची हमने,अंतर्मन के भावों ने जैसेपूरे कर दिए जैसे हमारे सपने।मन
Read Moreतुम्हारे लिए मेरे मन में प्यार दुलार सम्मान पवित्रताऔर अपनापन भी हैफिर भी तुमसे मिलने से डरता हूं,तुमसे नहीं तुम्हारी
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