8 प्रसंगावेदित क्षणिकाएँ
1. अशोभनीय कई चीजें हैं, जो शोभा नहीं देती ! अपने से कई बरस छोटी या बड़ी युवती को पत्नी
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Read More1. मूकदर्शक मनिहारी क्षेत्र के चौक-चौराहों, हाट-बाजारों में एक प्रतिशत लोग भी ‘मास्क’ नहीं पहन रहे हैं ! जनप्रतिनिधिगण और
Read More1. अनुत्तरित नेताजी के लापता-केस, शास्त्रीजी के संदेहास्पद मौत का केस फ़ाइल बंद नहीं हुई है, जो कि सीबीआई, रॉ
Read More1. अलगाव कोरोना विपदा ने कई दुश्मनों को दोस्त बनाए, पर कई दोस्त मुझसे अलग भी हो गए ! 2.
Read More1. बेवफा सनम मैं भी कृष्ण हूँ ! रंग कारे-साँवरे, माँ का नाम यशोदा, मौसी देवकी; तो कई हैं मेरे
Read More1. खय्याम हिंदी फिल्मों के संगीतकार “खय्याम” को सादर नमन और भावभीनी श्रद्धांजलि ! 2. गाली विद्या से जुड़ी एक
Read More1. मास्टर एक तो मास्टर डिग्री ली, दूजे ‘मास्टर’ भी बना; बावजूद हम जाति-धर्म से निकले नहीं, तो हमने इतनी
Read More1. काँव-काँव और कर ही क्या सकते हैं ? फेसबुक पर पत्रिका छापकर कौन सा तीसमार खां बने हैं ?
Read More1. सुविधाकामी ‘भाग्य’ कुछ नहीं होती ! हारे को हरिनाम….. पर वफादार कौन हैं, वक्त और सुविधा के अनुसार बदलते
Read More1. चाटुकार जनता घर पर पसीने से लथपथ, डरे राजा-चाटुकार, सूनी राजपथ ! बगूले और आदमी की खोज एक है,
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