ग़ज़ल
है उचित जब किसी से हो तुलनातब कसौटी पे खुद को ही कसना जो न चाहो कोई हॅसे तुम परमुफ्त
Read Moreफूल मज़े में है खार मज़े में हैझुठ्ठों का कारोबार मज़े में है। जिसे पहन कर भागे थे वहबाबा की
Read Moreहर दर्द सह कर पिता जी , मुस्कुराते आप थे।खुद रहते भूखे प्यासे हम को खिलाते आप थे।पिता छांव बरगद
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