मुक्तक
काल के गर्त में खो जायेगा, जो समय के साथ चल सका ना, नाम लेने वाला न मिलेगा, वक़्त के
Read Moreमुझे जानना है तो मेरी कविता में तलाशो, हज़ारों रंग में से निज पसंद रंग तलाशो। इन्द्रधनुष में तो मात्र
Read Moreजिनका अपने ही घर में आधार नहीं है दो के पक्ष में, चार से सरोकार नहीं है। विश्व समुदाय एकजुट
Read Moreदूर तिमिर को जो करें, बांटे सच्चा ज्ञान। मिट्टी को जीवित करें, गुरुवर वो भगवान।। जब रिश्ते हैं टूटते, होते
Read Moreप्रखर रूप मन भा रहा,दिव्य और अभिराम। हे ! गुरुवर तुम हो सदा,लिए विविध आयाम।। गुरुवर तुम हो चेतना,हो विवेक-अवतार।
Read Moreनव ख़बरों को साथ ले, आता है जो रोज़। सुबह उसी अख़बार की, हम करते हैं खोज।। दुनिया भर के
Read Moreशुभ काम मर्यादित रखो भाषा,घर में हो शुभ काम। आचरण रखो संयमित, खर्चो कुछ भी दाम।।1।। सुख-शांति जिस घर गुस्सा
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