पिता एक गाथा है
मौन सा सागरगहराई में छुपेअनकहे सपने कठोर सा रूपभीतर कोमल मनछांव सा स्नेह थामे हर दर्दहोंठों पर मुस्कानअडिग सा वृक्ष
Read Moreमौन सा सागरगहराई में छुपेअनकहे सपने कठोर सा रूपभीतर कोमल मनछांव सा स्नेह थामे हर दर्दहोंठों पर मुस्कानअडिग सा वृक्ष
Read Moreपुस्तकें फैलाए जीत मेंज्ञान का प्रकाशतुम्हारे लिए। पुस्तकें प्रकाशित करती हैंजीवन राह दिखातींतुम्हारे लिए। सबसे अच्छी साथी हैंजानना जरूरी हैतुम्हारे
Read Moreसुबह की चाय मेंहल्की सी मुस्कान छिड़ीबातें फिर भी तीखी खिड़की के कोने परधूप और परछाई कीचुपचाप सी लड़ाई तुम्हारी
Read Moreमनाते हैं मजदूर दिवसदशा पर दृष्टितुम्हारे लिए। व्यर्थ है मजदूर दिवसकितना बदलाव आयातुम्हारे लिए। हालत मजदूर की देखीभला समझे कितनातुम्हारे
Read Moreबीते दिन की धूपमन के आँगन में आजधीरे उतरती यादों के धागेसमय से बुनते रहतेजीवन का ताना कल की परछाईआज
Read Moreरात का आँगनचुपचाप बिछा देता हैसपनों की चादर थकी पलकों परशांत उतरती है हवासमय सो जाता दीपक की लौ भीधीरे-धीरे
Read Moreशाम की दहलीज़पगचिह्न धुँधलाए सेमन ठहर-सा गया राहें चुप खड़ीकदमों की आहट मेंएक पुकार रही धूप उतर चलीसाँझ की नरम
Read Moreराहें थीं सीधीअचानक मुड़ गईंपवन के संग धूप के सायेचलते रहे कदमदिशा बदली सूखी सी मिट्टीअंकुर फिर भी फूटेआशा जगी
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