लघु उपन्यास: रघुवंशी भरत (कड़ी 23)
उधर भरत जी का सन्देश पाकर गुरु वशिष्ठ जी के साथ आती हुई तीनों माताएँ श्री राम को देखने की
Read Moreउधर भरत जी का सन्देश पाकर गुरु वशिष्ठ जी के साथ आती हुई तीनों माताएँ श्री राम को देखने की
Read Moreअपनी कुटी के बाहर यज्ञ वेदी पर बैठे श्री राम की ओर देखते हुए भावविह्वल होकर भरत जी “भैया!” कहते
Read Moreभरत जी ने अपनी सेना को पर्वत की तलहटी में ही रोक दिया और जब तक अगला आदेश न मिले,
Read Moreश्री राम की आज्ञा पाकर लक्ष्मण जी एक ऊँचे शाल वृक्ष पर चढ़ गए और सभी दिशाओं में देखने लगे।
Read Moreश्री राम को चित्रकूट पर्वत बहुत प्रिय लगता था। वहाँ रहते हुए उन्हें अनेक दिन हो गये थे। एक दिन
Read Moreश्री राम का पता जानकर और मुनि की आज्ञा पाकर भरत जी ने अपनी सेना सहित सभी को चलने का
Read Moreजब सभी आगन्तुक यथास्थान बैठ गये, तो ऋषि भरद्वाज ने श्री राम के प्रति स्नेह होने के कारण भरत जी
Read Moreनिषादराज गुह हाथ जोड़कर बोले- “राजकुमार भरत जी! आप रात्रि को यहाँ सुखपूर्वक रहे हैं न? आपको सेना सहित कोई
Read Moreशत्रुघ्न जी का विलाप सुनकर तीनों माताएँ वहाँ आ गयीं। वे पतिवियोग के दुःख और उपवास के कारण बहुत दुर्बल
Read Moreभरत जी श्री राम के बारे में निषादराज गुह से अधिक से अधिक जान लेना चाहते थे कि वे वहाँ
Read More