बालगीत – माँ की लोरी
मुझे याद है माँ की लोरी। माँ थी मेरी कितनी भोरी।। बिस्तर जब गीला हो जाता। रोकर अपना कष्ट बताता।।
Read Moreमुझे याद है माँ की लोरी। माँ थी मेरी कितनी भोरी।। बिस्तर जब गीला हो जाता। रोकर अपना कष्ट बताता।।
Read Moreसुबह जगाने आता सूरज, शाम सुलाने आता चंदा। गर अदला-बदली हो जाए, झूम – झूमकर गाए बंदा।। पता नहीं सूरज
Read Moreगरम समोसे मुसकाते हैं ,मुँह में पानी वो लाते हैं। तीन नुकीले कोनों वाले ,सबके मन को ललचाते हैं। स्वाद
Read Moreमैं अपनी मम्मी-पापा के,नयनों का हूँ नन्हा-तारा।मुझको लाकर देते हैं वो,रंग-बिरंगा सा गुब्बारा।।—मुझे कार में बैठाकर,वो रोज घुमाने जाते हैं।पापा
Read More1.हिंदी है भारत की शान हम हैं आज के जागरुक बच्चे, हिंदी से है हमको प्यार, भाषाएं कितनी भी सीखें,
Read Moreचमक रहा था आसमान में, रात अंधेरी वो बरसात में । एक बच्चे की जो पड़ी नज़र, पकड़ लिया उसको
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