सुरक्षित बचपन और सम्मानित स्त्रीत्व : समाज की वास्तविक परीक्षा
किसी भी सभ्य समाज की पहचान उसके ऊँचे भवनों, तकनीकी प्रगति या आर्थिक विकास दर से नहीं होती, बल्कि इस
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Read Moreडिजिटल युग में सूचना की गति जितनी तेज़ हुई है, उतनी ही तेज़ी से उसके स्वरूप में परिवर्तन भी आया
Read More— संजय सक्सेना डिजिटल दुनिया में जो कुछ सालों से चल रहा था, उस पर आखिरकार सरकार ने सख्त ब्रेक
Read Moreसरकार जब भी आर्थिक अनुशासन, बजट संतुलन या खर्च घटाने की बात करती है, तो सबसे पहले निशाने पर सामाजिक
Read Moreकिसी भी सभ्य समाज की पहचान उसके उत्सवों से नहीं, बल्कि उसके शोक से होती है। समाज दुःख को किस
Read Moreवैलेंटाइन डे का नाम लेते ही आज मन में गुलाब, चॉकलेट, टेडी और महंगे गिफ्ट्स की चमकदार तस्वीर उभर आती
Read Moreहोली एक पवित्र त्योहार है,जहां आपसी मतभेद मिटाकर लोग आपस में गले मिल जाते ,और एक दूसरे को रंग.. अवीर
Read Moreहम बात करते हैं एक सभ्य, लोकतांत्रिक और संवेदनशील समाज की — ऐसा समाज जो अपने सदस्यों के अधिकारों, सम्मान
Read Moreहरियाणा में गुमशुदगी के बढ़ते मामले अब केवल पुलिस रजिस्टरों या अख़बारों की सुर्खियों तक सीमित नहीं रहे हैं। ये
Read Moreकिसी भी समाज के समग्र विकास का मूल्यांकन इस बात से किया जा सकता है कि वहाँ महिलाओं को शिक्षा,
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