गीतिका/ग़ज़ल *मदन मोहन सक्सेना 27/10/2015 ग़ज़ल(खुदा जैसा ही वह होगा), मदन मोहन सक्सेना ग़ज़ल(खुदा जैसा ही वह होगा) ग़ज़ल(खुदा जैसा ही वह होगा) वक़्त की साजिश समझ कर, सब्र करना सीखियें दर्द से ग़मगीन वक़्त यूँ ही गुजर Read More