राजनीति

छह माह में आशाओं के नये दीप जले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत वाली भाजपा गठबंधन सरकार के अब छह माह पूर्ण हो गये हैं। इन छह माह में मोदी सरकार जिस प्रकार से आगे बढ़ रही है उससे देश की जनता में आशा की नयी उम्मीद जगी हैं नये दीप जले हैं। विगत छह माह में काफी कुछ बदलाव […]

कविता

कविता : वे स्त्रियां

वे स्त्रियाँ निकली थीं वे अपने वजूद की तलाश में बाजारवाद ने बड़ी बड़ी आंखों से उन्हें देखा खो गई वे उस तिलिस्म दुनिया में बढती महत्वकांक्षाओं के आगे टेक दिए घुट्ने अपना लिया अमेरिका का आड्म्बर यूरोप का फैशन भूलाकर भारतीय दर्शन घर की चौखट लांघते कांपते थे जो कदम आज वे धड़ल्ले से […]

लघुकथा

ज़िंदगी जीने की सीख

माँ ने एक शाम दिनभर की लम्बी थकान एवं काम के बाद जब डिनर बनाया तो उन्होंने पापा के सामने एक प्लेट सब्जी और एक जली हुई रोटी परोसी। मूझे लग रहा था कि इस जली हुई रोटी पर पापा कुछ कहेंगे, परन्तु पापा ने उस रोटी को आराम से खा लिया । हांलांकि मैंने […]

कविता

प्रतीक

  तेरी आँखों में कशिश है मेरा मन भी रसिक है तेरे ओंठ पंखुरियों से गुलाबी है मुझमे भी प्यास अधिक है तेरे मन दर्पण में मेरी ही छवि उभर आई है मेरी चेतना मे गूँजता तेरा नाम अत्यधिक है रूबरू मिल नही सकते दोनो प्रेम में चिर विरह शरीक हैं तन से तन का […]

उपन्यास अंश

आत्मकथा : मुर्गे की तीसरी टांग (कड़ी 6)

कक्षा तीन उत्तीर्ण करने के बाद मैं कक्षा चार में आया जहाँ मेरे अध्यापक हुए पचावर गाँव के निवासी श्री चरण सिंह जी, जिन्हें सभी ‘मुंशी जी’ कहकर पुकारते थे। वे बहुत ही सज्जन व्यक्ति थे और गाँव-इलाके में बहुत लोकप्रिय थे। सांस्कृतिक गतिविधियों में उनकी रुचि हालांकि कम थी, लेकिन वे पढ़ाते बहुत अच्छा […]

कविता

लौ

  जीने के लिए तुम्हें याद करता हूँ गम ए जाना से फर्याद करता हूँ तन्हा ही जलता हैं अंधेरें में चराग़ तन्हाई में लौ सा तुमसे संवाद करता हूँ सफ़ीना कोई एक डूबने को है भव सागर से प्रतिवाद करता हूँ उलझ गयी हैं तितलिया काँटों में अंतरात्मा से वाद विवाद करता हूँ खिलते […]

कविता

हाइकू – दोस्त, मित्र, सखा

  यौवन काल तरुण या तरुणी परम मित्र छोड़े मित्र बिखरता जीवन गहरा घाव मिलते मित्र दिल की बाते सब साझा करते मित्र अमूल्य जुड़े दिल से दिल स्वार्थ से परे हंसाता मित्र रुलाता कभी कभी जीवन भर सिखाये गुण दूर हो अवगुण निखारे मित्र कृष्ण सुदामा मित्रता का पर्याय बने आदर्श दिल का रिश्ता […]

कविता

ताँका

= 1 बेदर्दी शीत विग्रही गिरी हारे व्याकुल होता विकंपन झेलता ओढ़े हिम की घुग्घी। 2 शीत की सरि प्रीत बरसाती स्त्री फिरोजा होती ड्योढ़ी सजी ममता अंक नाश समेटे। 3 हिम का झब्बा काढ़े शीत कशीदा भू शादी जोड़ा हर्षित है भुवन कोप रवि का मिटा। =रेशम ,कलाबत्तू के तारों का गुच्छा = झब्बा […]

कविता

हीरे का नग

  तुम मुझसे हो अलग रहे हो बेवफा से क्यों लग रहे हो कहे थे कई जन्मों तक साथ रहोगे फिर मुझसे दूर क्यों भग रहे हो मेरा गुनाह क्या है बता दो ज़रा मुझे याद कर क्यों जग रहे हो तेरे दर पर दीये सा जलता रहा मेरी इबादत को क्यों ठग रहे हो […]

इतिहास

आर्य (हिंदी) भाषा की वर्ण एवं लिपि का आरम्भ कब हुआ?

शंका– आर्य (हिंदी) भाषा की वर्ण एवं लिपि का आरम्भ कब हुआ? समाधान– आर्य (हिंदी) भाषा की लिपि देवनागरी हैं। देवनागरी को देवनागरी इसलिए कहा गया हैं क्यूंकि यह देवों की भाषा हैं। भाषाएँ दो प्रकार की होती हैं। कल्पित और अपौरुषेय। कल्पित भाषा का आधार कल्पना के अतिरिक्त और कोई नहीं होता। ऐसी भाषा […]