धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

मर्यादा पुरूषोत्तम एवं योगेश्वर दयानन्द

महर्षि दयानन्द को 13, 15 और 17 वर्ष की आयु में घटी शिवरात्रि व्रत, बहिन की मृत्यु और उसके बाद चाचा की मृत्यु से वैराग्य उत्पन्न हुआ था। 22 वर्ष की अवस्था तक वह गुजरात प्राप्त के मोरवी नगर के टंकारा नामक ग्राम में स्थित घर पर रहे और मृत्यु पर विजय पाने की ओषधि […]

कहानी

कहानी : फर्ज

ट्रिन-ट्रिन अचानक फोन की घंटी घनघना उठी,पीहू ने फोन उठाया सामने से बेटे रंजन की आवाज आई- ”ममा, मै ,कल आ रहा हूँ;मेरा दीक्षांत समारोह सम्पन हो गया,अब मै आपके साथ कुछ दिन तो आराम से मस्ती करूंगा|’ उसने सब एक साँस मे बोल कर फोन कट कर दिया; पीहू कुछ बोलने का मौका ही […]

कविता

पल भरमे ……..

पल भरमे …….. हां बहुत कुछ हुआ इस बीच मुझे पटरिया समझ कर वक्त ,कई रेलों की तरह मुझ पर से गुजर गया फिर भी मै ज़िंदा हूँ ताज्जुब है …. कविता लिखने के लिये फिर जीना फिर मरना क्या जरूरी है ..? अपनी सवेंदानाओ कों जानने के लिये कभी बूंद भर अमृत कभी प्याला […]

लघुकथा

टीपन की सच्चाई

भैया से कह कर गोलू का नामाकंन डोनेशन देकर क्यूँ नही करवा देती हैं , जानती ही हैं ,इसके टीपन में ही लिखा है कि ये पढ़ेगा लिखेगा नहीं …. भाभी सन्न रह गई अपने देवर की बात सुनकर …. सोच में पड़ गई , सच तो नही है टीपन में लिखी बातें …. दो साल […]

कविता

अच्छा नहीं होता गुस्सा

अच्छा नहीं होता गुस्सा पर हो जाता है मन में गुस्सा जब कभी मन माफिक नहीं होता कोई भी काम नहीं मानते अपने ही कोई बात फिर क्या करें ? हो जाएँ मौन ? फिर समझ पायेगा कौन? आप सहमत हैं या असहमत क्योंकि लोग तो यही कहेंगे मौनं स्वीकृति लक्षणं मन में रखने से […]

उपन्यास अंश

आत्मकथा : मुर्गे की तीसरी टांग (कड़ी 8)

बाबा के ही गाँव कारब के निवासी एक अन्य अध्यापक थे श्री बाबू लाल शास्त्री। शास्त्री जी हिन्दी और संस्कृत के विद्वान थे। संस्कृत पढ़ाने का उनका तरीका बहुत अच्छा था। यही कारण है कि संस्कृत जैसे कठिन विषय में भी मेरी रुचि अच्छी तरह जाग्रत हो गयी थी। आगे हाईस्कूल तक मेरे पास संस्कृत […]

कविता

मेरे लिए खूबसूरती का मतलब तुम हो

मेरे लिए खूबसूरती का मतलब तुम हो चाहे ओस से भींगा रह गया गुलाब का अब तक एक फूल हो चाहे सूर्यमुखी का रंग चुरा आँगन मे खिल आयी धूप हो लेकीन … मेरे लिए खूबसूरती का मतलब तुम हो चाहे चांदनी रात की बांहों मे गर्म साँसों से पिघल रहा पर्वतो का हिम हो […]

सामाजिक

डिप्रेशन : आज की बढ़ती समस्या

हमारे जीवन में किसी के भी प्रति दो तरह का नज़रिया होता है, (१) नकारात्मक (२) सकारात्मक​, नकारात्मकता ..जो कि आगे जाकर अवसाद की स्थिति निर्मित कर देती है! पहले थोडा सकारात्मक पहलू को देख लेते हैं. जब व्यक्ति की सोच पोजिटिव मतलब सकारात्मक होती है, वह लोगों की बात सुनता-समझता है ,उसके बाद अपने विचार […]