संस्मरण

स्मृति के पंख – 21

रिसालपुर आकर दूसरी साथ वाली दुकान भी हमने ले ली। बाकी जैसा भ्राताजी ने कहा था, दुकान पर काफी काम था। हमारा पड़ोसी दुकानदार मेरठ की तरफ से आया था और पंडित था। वह भी अकेला काम करता था। काम उसके पास बहुत था। उसके भी काफी ग्राहक हमारे पास आने लगे। भ्राताजी नौशहरा से […]

कविता

शादी तो आबाद करती है उनका जीवन

शादी बर्बादी होती है मुरख है जो यह कहते है शादी से तो घर घर होता है वर्ना चिड़िया घर सा होता है बच्चों को माँ जैसे संभालती है पत्निया पतियों को संभालती है माँ प्यार से घर को एक मंदिर बनाती है पत्निया उस मंदिर को अपनी जतन से आगे बढाती है माँ बेटे […]

स्वास्थ्य

बीमार रहने का शौक

शीर्षक पढ़कर चौंकिये मत! बहुत से लोग होते हैं जिन्हें बीमार रहने और दवाइयां खाते रहने का शौक होता है। यह एक मानसिक बीमारी है। वे यह मानते हैं कि दवाइयां खाये बिना कोई जी ही नहीं सकता और स्वस्थ रह ही नहीं सकता। डाक्टर लोग भी अपने स्वार्थ के लिए उनके मन में यह […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक माणिक

प्रेम की अविरल बहेगी धार जब ; खिलखिलायेगा सकल संसार जब । तब किसी मन में ना होगी कामना ; सत्य से हो जाओगे दो चार जब । रास्ते हो जाय सब दुश्वार जब ; पाओं चलने से करें इंकार जब । हैं सहारा एक बस परमात्मा ; बेसहारा छोड़ दे संसार जब । दिल […]

हाइकु/सेदोका

कुछ हाइकू

{मेरी पहली कोशिश} 1.पेड़ लगाएं पेड़ों से है जीवन जीवन पाएं. 2.खो गई हूं मैं मुझे रास्ता दिखा दे ऐ मेरे खुदा. 3.रंग बिरंगी मेरे भैया की राखी मुझको भाती. 4. तुझे प्रणाम जग जननी नारी तू है महान. 5.हाइकु लाया गागर में सागर मन हर्षाया.

कुण्डली/छंद

ताजी खबर : ताजी कुंडलिया

एक साल पूरा हुआ, सेवक बने प्रधान। बता रहें कर रैलियाँ, अपना मेगा प्लान। अपना मेगा प्लान, अभी क्या करना बाकी। और चाहिए वक्त, नशा चढ़ने में साकी। कह ‘पूतू’ कविराय, साफ करते हैं कूड़ा। गिना रहें उपलब्धि, हुआ एक साल पूरा॥

राजनीति

आपने मांगी ही कब ३७० सीटें ?

अब बेहद आश्चर्य हो रहा है जब राम मंदिर,धारा ३७० आदि मुद्दों के जवाब में अमित शाह जी उलटे लोगों को ही संविधान सिखा रहे हैं की ये आपको मालुम होना चाहिए की उसके लिए लोकसभा में ३७० सीटें चाहिए ! पहले संविधान पढ़कर आइये फिर बात कीजिये ! और बेचारे लोग और पत्रकार इतने […]

कविता

”सैलाब बह गया”

कल फिर किसी ने ,दुखती रगों पर हाथ रख गया ,,,,,, शांत सी पड़ी झील में, फिर कोई तूफान मचलने लग गया ……… वक्त के बेहिसाब झोंकों ने ,फिर से बेरहमी का सबूत दिया ,,, अगर पीछे मुड़कर देखती तो ,शायद बात ही कुछ और होती …… पर अब सबकुछ बदल बदल गया अब तो […]

लघुकथा

विज्ञान के चमत्कार

ये उस वकत की बात है जब कंप्यूटर इस्तमाल में नहीं आये थे | सविता देवी की बेटी पूनम की शादी विदेश में हुई थी| उसने अपनी लाड़ली को इतनी दूर ब्याहने के बारे में उसने कभी सोचा भी नहीं था पर, जैसे कहते हैं न! यह सब संयोग की बात होती है। इस पर […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म ब्लॉग/परिचर्चा

धर्म नहीं, श्रेष्ठता की होड़ है असल समस्या

क्या कभी आपने इस विषय पर कहीं भी, कभी भी कोई डिबेट या विश्व स्तरीय चर्चा आदि होते देखा या सुना है कि मनुष्य प्राणी विश्व के अन्य जीवों से श्रेष्ठ है या नहीं ? मेरे ख्याल से मनुष्य प्राणी ही सर्वश्रेष्ठ है; इस नतीजे पर पहुंचाने वाली ऐसी कोई डिबेट या चर्चा के जिक्र […]