कहानी

खुसरो अमीर के बलि बलि जायें – सुधीर मौर्य

परियों, तितली, राजा-रानी की कथाएँ कभी पुरानी होती है क्या-कभी नहीं जब सुनो तब नई। एक जमाने में बुझोपुर में एक राजा था। बुझोपुर-शायद उस राज्य का पहले नाम कुछ और रहा होगा पर अब था बुझोपुर। इसके पीछे भी एक कथा है। राजा था पहेलियां बूझने और बुझवाने का बड़ा रसिया। दरबार का राज […]

कविता

गुर्राना सही वक़्त हो तो

बनना नहीं किसी की देवी बनना नहीं किसी की दासी भुलाना नहीं तुम हो जननी जगतजननी रूपा भुलाना नहीं अपने जज्बातों को निभाना अपने चुने रिश्तों को निभाना अपने मिले दायित्वों को डरना नहीं दहलीज़ पार की तो डरना नहीं मंजिल नहीं दिख रही तो थामना अपने हौसले के पंख को थामना मदद मांगने वाले […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म ब्लॉग/परिचर्चा लेख सामाजिक

धार्मिक आयोजन के दौरान भगदड़

वैसे तो कहा जाता है कि सभी धर्म ईश्वर के द्वार तक पहुँचानेवाले अलग-अलग रास्ते हैं. सभी धर्मों में अच्छी बातें ही बताई गयी हैं. व्याख्या करनेवाले अपने-अपने तरीके से व्याख्या करते हैं और उनमे भी अक्सर विवाद होते ही रहते हैं. सभी धर्मों में सदाचार, अहिंसा, आत्मशुद्धि, स्वच्छता, पवित्रता, भाईचारा, आपसी सदभाव, मेल-जोल का […]

मुक्तक/दोहा

दोहे

कलम चली कविराय की, लय ललक आह्लाद मुग्ध हुए श्रोता सभी, रचना बने अगाध ।। रस छंदों की मापनी, रचना भाव बनाय पहला अक्षर प्रेम का, शब्द सराहे आय ।। बोली भाषा गांव की, माटी रखे सुगंध सज्जनता अरु साधुता, बैठक में सत्संग ।। धनी रहे साहित्य वो, जाने सकल जहान शिल्प सृजन मन रहे, […]

सामाजिक

बच्चे हमारे आचरण से सीखते हैं, उपदेश से नहीं

एक बार अपनी एक मित्र के घर जाने का मौक़ा मिला। मेज़बान मित्र ने अपनी नन्ही सी पोती से कहा कि आंटी को नमस्ते करो। सहमी हुई सी बच्ची ने मुँह फेर लिया। उसकी दादी ने बच्ची का मुँह मेरी ओर घुमाते हुए बच्ची से फिर कहा कि आंटी को नमस्ते करो। बच्ची ने नमस्ते […]

गीत/नवगीत

ओज गीत

सुनो घायल घाटी की पीर चीर दो जयचंद जाफर मीर तुम्हें कश्मीर से गर है प्यार करो अब वार के बदले वार सारी कायरता को दो छोड़ तिलक शेखर सी बुझाएँ मोड़ युद्ध का बिगुल बजाओ शत्रु पर बम बरसाओ प्यार का हमने रखा प्रस्ताव किन्तु बदले में मिले बस घाव फिर भी खामोश रहे […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

सद्-असद् का सनातनी संघर्ष

शताब्दियों वर्ष पूर्व से इतिहास प्रमाणित करता आ रहा है कि सामाजिक समरूपता, आध्यात्मिकता व धार्मिकता के प्रभाव के कारण हमारा यह भारत देश सम्पूर्ण विश्व में सदैव अग्रणी रहा है। हमारे ज्ञान के दर्पण वेद-पुराण, उपनिषद् एवं दर्शन ऐसी कसौटियां रही हैं, जिनमें तरासे मानव में सद्गुणों की स्वतः वृद्धि हो जाती है और […]

कविता

एहसान पात्र बेटियाँ

बेटी की नहीं होती है क्यों अपनी कोई पहचान, इसके जीवन को सभी समझते अपना एहसान। सबके एहसानों तले ये हरदम दबी रहती है, मन को मारकर जिनेवाली कभी नहीं उबरती है। चारदीवारी से कैसे निकले द्वार पर है क़ई बंधन, एहसान नहीं चाहिए उसे अधिकार और आरक्षण। सिने में दबी है आग इसके तूफान […]

विज्ञान

लोक लोकान्तर के परस्पर आकर्षण शक्ति से स्थिर होने विषयक वैज्ञानिक मत पर शंका और उसका महर्षि दयानन्द का समाधान

ओ३म्     वैज्ञानिकों का मानना व कहना है कि ब्रह्माण्ड के सभी लोक लोकान्तर परस्पर के आकर्षण व गति से अपने वर्तमान स्वरूप में गतिशील होकर विद्यमान हैं तथा इनका रचयिता, धारण व पालनकर्त्ता कोई नहीं है।   वैज्ञानिकों की इस मान्यता वा शंका का महर्षि दयानन्द ने ऋग्वेद के दूसरे मण्डल के छठें […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ख्वाहिशें ले के हम हज़ार गए, पर तेरे दर से बेकरार गए तुझे गैरों से ना मिली फुर्सत, हम तुझे मिलने कितनी बार गए चाहा जो ना मिल सका मुझको, यूँ ही बस जिंदगी गुज़ार गए थोड़ी अपनी भी गल्तियां थी और, थोड़े हालात हमको मार गए हाकिम-ए-वक्त कल तलक थे जो, आज रह सुर्खी-ए-अखबार […]