Monthly Archives: January 2016

  • ~इंसानियत जगा रहे~

    ~इंसानियत जगा रहे~

    हमें हैरान-परेशान देख एक व्यक्ति ने हमसे पूछा क्या खोज रही है आप हमने कहा ही था कि इंसानियत वह सुन सकपकाया हमें तरेर कर देखा शायद पागल समझ बैठा थोड़ा हैरान हो बोला बड़ी अजीब...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    १ } गम पीके यूँ गमगीन ना बन हंस दे जरा दीनहीन ना बन मीठी-मीठी कर बात मुझसे धैर्य धर, यूँ तू धैर्यहीन न बन| सविता   २}चंद खुशियाँ समेट ले गम के बाजार से चाहत...


  • सबसे मिलिए धाय

    सबसे मिलिए धाय

    बिना एक बूँद गिराए पन्नियों में पलटते दूध पर उसकी बराबर नज़र थी। कहीं मिट्ठू चूँके तो उसे अच्छे से गरिया दें। मगर मिट्ठू मियां के सधे हाथ बराबर एक लीटर दूध एक लीटर की पन्नी...

  • मेरा तमाशा

    मेरा तमाशा

    मैं तो देखने गई थी तमाशा पर अब खुद ही तमाशा बनी हूँ। कभी था दिया, राह के रोड़े को ठोकर अब खुद ही कीचड़ से सनी हूँ   कल की मसली चींटी आगे मेरे आज,...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    जब तक ना दिल दीवाना था, हर इक गम से अंजाना था अपनी मर्ज़ी के मालिक थे, और कदमों तले ज़माना था तब गीत बहारें गाती थीं, मौसम भी बड़ा सुहाना था तिरछी नज़र से लूट...



  • दोहा

    दोहा

    प्रथम नमन् गणपति करूँ , रिद्धि सिद्धि के साथ / दूजा नवग्रह को करूँ —- रहें दाहिने हाथ / ==================================== माँ शारद माइया तुझे – कोटि -कोटि प्रणाम / ज्ञान दायनी माँ करो, जिहवा पर विश्राम/...

  • एक गीत

    एक गीत

      कहने को तो सब कहते हैं, हम सब हिन्दुस्तानी, सबके राम रहीम अलग हैं, सबकी अलग कहानी। 1 हम सब फूल एक उपवन , कहना आसान नहीं है, इंसानों का क़त्ल करे जो, वो इंसान...