कविता पद्य साहित्य

~इंसानियत जगा रहे~

हमें हैरान-परेशान देख एक व्यक्ति ने हमसे पूछा क्या खोज रही है आप हमने कहा ही था कि इंसानियत वह सुन सकपकाया हमें तरेर कर देखा शायद पागल समझ बैठा थोड़ा हैरान हो बोला बड़ी अजीब हो यहाँ इंसानों की भीड़ है भरी और तुम्हे इंसानियत ही नहीं दिखी| हमने कहा हा नहीं! कही नहीं […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

१ } गम पीके यूँ गमगीन ना बन हंस दे जरा दीनहीन ना बन मीठी-मीठी कर बात मुझसे धैर्य धर, यूँ तू धैर्यहीन न बन| सविता   २}चंद खुशियाँ समेट ले गम के बाजार से चाहत यह अपनी क्यों कर ना अब मार ले हर एक मोड़ पर बैठा है कोई काफिर कैद हो जाये […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

जीवात्मा वा मनुष्य की मृत्यु और परलोक

ओ३म् महाभारत के एक अंग भगवद्-गीता के दूसरे अध्याय में जन्म व मृत्यु विषयक वैदिक सिद्धान्त को बहुत सरल व स्पष्ट रूप से प्रतिपादित किया गया है। गीता के इस अध्याय में कुछ प्रसिद्ध श्लोकों में से 3 श्लोक प्रस्तुत हैं। यह तीन श्लोक गीता के दूसरे अध्याय में क्रमांक 22, 23 तथा 27 पर […]

कहानी

सबसे मिलिए धाय

बिना एक बूँद गिराए पन्नियों में पलटते दूध पर उसकी बराबर नज़र थी। कहीं मिट्ठू चूँके तो उसे अच्छे से गरिया दें। मगर मिट्ठू मियां के सधे हाथ बराबर एक लीटर दूध एक लीटर की पन्नी में और आधा लीटर दूध आधे लीटर की पन्नी में डाल फट से गंठियाकर ग्राहक को धराते जा रहे […]

कविता

मेरा तमाशा

मैं तो देखने गई थी तमाशा पर अब खुद ही तमाशा बनी हूँ। कभी था दिया, राह के रोड़े को ठोकर अब खुद ही कीचड़ से सनी हूँ   कल की मसली चींटी आगे मेरे आज, तन रही है गई थी भीड़ का हिस्सा बनने अब भीड़ मुझ से, बन रही है   तमाशबीनों ने […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जब तक ना दिल दीवाना था, हर इक गम से अंजाना था अपनी मर्ज़ी के मालिक थे, और कदमों तले ज़माना था तब गीत बहारें गाती थीं, मौसम भी बड़ा सुहाना था तिरछी नज़र से लूट लिया, कैसा गज़ब निशाना था जिसको अपना समझा हमने, गैर था वो, बेगाना था ज़रा सी बात से टूट […]

सामाजिक

ऋषिभक्त व आर्यसमाज के अनुयायी श्री दौलत सिंह राणा और देहरादून में श्री चेसायार का रैफेल होम

ओ३म् हमारे एक मित्र श्री दौलत सिंह राणा देहरादून के रैफेल होम की कुष्ठ रोगियों की कालोनी शिवसदन में अपने परिवार के साथ विगत लगभग 50 वर्षों से रहते हैं। यह रैफल होम ग्रुप कैप्टेन जियोफरी लियोनार्ड चेसायार (जन्म 7 सितम्बर, 1917 तथा मृत्यु 31 जुलाई, 1992) द्वारा 5 अप्रैल, सन् 1958 को स्थापित है। […]

सामाजिक

ईश्वर-वेद-दयानन्द भक्त तपस्वी व त्यागी आचार्य बलदेव जी महाराज (आज मृत्यु दिवस पर)

ओ३म् —जिसकी कीर्ति है वह मरता नहीं सदैव जीवित रहता है— वेद-वेदांग, व्याकरण के पण्डित, कर्मयोगी, तपस्वी, वयोवृद्ध विद्वान, आदर्श चरित्र के धनी, नैष्ठिक ब्रह्मचारी आचार्य बलदेव जी अब नहीं रहे। आज प्रातः 28 जनवरी, 2015 को लगभग 85 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। महात्मा आचार्य बलदेव जी ने अपने जीवन में […]

मुक्तक/दोहा

दोहा

प्रथम नमन् गणपति करूँ , रिद्धि सिद्धि के साथ / दूजा नवग्रह को करूँ —- रहें दाहिने हाथ / ==================================== माँ शारद माइया तुझे – कोटि -कोटि प्रणाम / ज्ञान दायनी माँ करो, जिहवा पर विश्राम/ ===================================== शब्द -शब्द मोती बने , उर मे करो निवास/ भक्त यही चाहत करे , शब्द कोष ले आस […]

गीत/नवगीत

एक गीत

  कहने को तो सब कहते हैं, हम सब हिन्दुस्तानी, सबके राम रहीम अलग हैं, सबकी अलग कहानी। 1 हम सब फूल एक उपवन , कहना आसान नहीं है, इंसानों का क़त्ल करे जो, वो इंसान नहीं है, हो दंगा फसाद तो उनके चेहरे खिलते हैं, ये संयोग नहीं है उनके ,घर ही बम मिलते […]