Monthly Archives: May 2019

  • मुक्त करो भगवन को आज!

    मुक्त करो भगवन को आज!

    सदियों से मंदिर की चौखटों में, मनुष्य बचाता रहा है ईश्वर की लाज, पर दम घोंट कर मारने से बेहतर; मुक्त करो भगवन को आज! बेलपत्र, दूध, गंगाजल,चन्दन ,धूप, हरेक से शुद्ध कराया ईश्वर को, पर...

  • छीजन

    छीजन

    ”प्रकृति तुम क्यों छीजती जा रही हो?” प्रकृति के उदास-से चेहरे को देखते हुए मनुष्य ने पूछा था. ”तुम पूछ रहे हो? क्या यह बात तुमसे छिपी हुई है, कि मनुष्य की उदासीनता का मकड़जाल ही...



  • आश

    आश

    मैं मंजिलो पर पहुँचकर अक्सर भटक जाता हूँ। तेज चलते – चलते पता नही क्यों रुक जाता हूँ।। लगता है बस अब सारे सपने पूरे होने वाले है। अगले ही पल आँखों में टूटे सपनो के...

  • कविता “शब्द”

    कविता “शब्द”

    बचपन में जब हम छोटे होते तो मुँह से कुछ भी ऊलजुलूल निकाल लिया करते थे और फिर माँ का डांट से बिगडें हुये शब्दों की गलतियाँ मान लिया करते थे पर आज जब बड़ा हो...

  • मेरे पिता

    मेरे पिता

    बरगद की गहरी छांव जैसे मेरे पिता जिंदगी की धुप में घना साये जैसे मेरे पिता यदि ईश्वर हैं जमीं पर तो धरा पर ईश्वर का रूप हैं मेरे पिता शीतल पवन के झरने जैसे मेरे...


  • विशेष सदाबहार कैलेंडर-135

    विशेष सदाबहार कैलेंडर-135

    स्वास्तिक भाई के जन्मदिन पर विशेष 1.फूलों में खुशबू, हवाओं में ताज़गी है, नदियों में पानी, पानी में रवानगी है, हम ही नहीं कुल जहान कह रहा है, जन्मदिन मुबारक हो, भव्यता से भरी आपकी सादगी...

  • गज़ल

    गज़ल

    बस इसी एक भूल ने मुझे बरबाद किया मासूमियत से मैंने दुश्मनों पे एतमाद किया इस दौलत से मालामाल रहोगे तुम अब गम उम्र भर का दे के उसने ये इरशाद किया मेरा होगा तो लौट...