कविता

मुक्त करो भगवन को आज!

सदियों से मंदिर की चौखटों में, मनुष्य बचाता रहा है ईश्वर की लाज, पर दम घोंट कर मारने से बेहतर; मुक्त करो भगवन को आज! बेलपत्र, दूध, गंगाजल,चन्दन ,धूप, हरेक से शुद्ध कराया ईश्वर को, पर आडम्बर की दलदल में फँसता गया समाज,सो मुक्त करो भगवन को आज! जो शीश बदल जाए हर साल, उसी […]

लघुकथा

छीजन

”प्रकृति तुम क्यों छीजती जा रही हो?” प्रकृति के उदास-से चेहरे को देखते हुए मनुष्य ने पूछा था. ”तुम पूछ रहे हो? क्या यह बात तुमसे छिपी हुई है, कि मनुष्य की उदासीनता का मकड़जाल ही मेरी उदासी का कारण है!” प्रकृति रुआंसी-सी हो रही थी. ”वो कैसे?” ”अब यह भी मुझे ही बताना पड़ेगा? […]

कविता

कविता – विछोह की पीड़ा

पता नही किस शहर में, किस गली तुम चली गई। मै ढूँढ़ता रह गया,तुम छोड़ गई । पता नही हम किस मोड़ पर फिर कभी मिल पाएँगे । इस अनूठी दुनिया में फिर किस तरह से संभल पाएँगे । पता नही तेरे बिन हम, जी पाएँगे या मर जाएँगे । हम बिछड़ गए उस दिन,जिस […]

गीतिका/ग़ज़ल

धड़कने न बढ़ाओ प्रिये

नज़र से नज़र न मिलाओ प्रिये यूँ धड़कने मेरी न बढ़ाओ प्रिये। बढ़ने लगें दिलों की बेचैनियाँ हाले दिल भी न सुनाओ प्रिये। अभी जीना है चैन,सुकूँ से हमें इश्क़ की आग न जलाओ प्रिये। बहकने लगें यह कदम भी मेरे जाम आखों से न पिलाओ प्रिये। मिल पाना कभी भी संभव नहीं कोरे सपने […]

कविता

आश

मैं मंजिलो पर पहुँचकर अक्सर भटक जाता हूँ। तेज चलते – चलते पता नही क्यों रुक जाता हूँ।। लगता है बस अब सारे सपने पूरे होने वाले है। अगले ही पल आँखों में टूटे सपनो के जाले है।। बनती बिगड़ती उम्मीदों के पीछे रोज भागता हूँ। सपने पूरे होने की ख्वाहिश में रोज मैं जागता […]

कविता

कविता “शब्द”

बचपन में जब हम छोटे होते तो मुँह से कुछ भी ऊलजुलूल निकाल लिया करते थे और फिर माँ का डांट से बिगडें हुये शब्दों की गलतियाँ मान लिया करते थे पर आज जब बड़ा हो गया हूँ तो सोचता हूँ, दिल में शब्द तो हैं,पर जुबाँ पर लाने का कोई सलीका नहीं है और […]

कविता

मेरे पिता

बरगद की गहरी छांव जैसे मेरे पिता जिंदगी की धुप में घना साये जैसे मेरे पिता यदि ईश्वर हैं जमीं पर तो धरा पर ईश्वर का रूप हैं मेरे पिता शीतल पवन के झरने जैसे मेरे पिता चुभती धुप में सहलाते मेरे पिता बच्चो संग मित्र बनकर खेल खेलते मेरे पिता उनको उपहार दिलाकर ख़ुशी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल – आँखों में सँभालता हूँ पानी

आँखों में सँभालता हूँ पानी आया है प्यार शायद ख़ुशबू कैसी, झोंका हवा का घर में बार बार शायद रात सी ये ज़िंदगी और ख़्वाब हम यूँ बिसार गए बार बार नींद से जागे टूट गया है ए’तिबार शायद सिमटके सोते हैं अपने लिखे ख़तों की सेज बनाकर माज़ी की यादों से करते हैं ख़ुद […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

विशेष सदाबहार कैलेंडर-135

स्वास्तिक भाई के जन्मदिन पर विशेष 1.फूलों में खुशबू, हवाओं में ताज़गी है, नदियों में पानी, पानी में रवानगी है, हम ही नहीं कुल जहान कह रहा है, जन्मदिन मुबारक हो, भव्यता से भरी आपकी सादगी है. 2.खुश रहिए हमेशा, यह दुआ है हमारी, राह तकें बुलंदियां, सदियों तक तुम्हारी, जन्मदिन आपका प्रेम से मनाने […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

बस इसी एक भूल ने मुझे बरबाद किया मासूमियत से मैंने दुश्मनों पे एतमाद किया इस दौलत से मालामाल रहोगे तुम अब गम उम्र भर का दे के उसने ये इरशाद किया मेरा होगा तो लौट आएगा इक रोज़ खुद ही जा तुझे कैद-ए-मुहब्बत से अब आज़ाद किया आज फिर तीर चलाएँ है तूने जी […]