कविता

मनहरण घनाक्षरी

पुष्पवाटिका खिली है, मधुमास मदमस्त, विष्णु प्रिया खिल रही, तुलसी आँगन की। बसंत की ये बहारें, भर रही अब स्याही, अधरों पे कलम ने, कर लिया है कब्ज़ा। ऋतुराज का आलम, फिज़ाओं में कलियों में, कृष्ण की बाँसुरी बजी, अनुराग भरी है। सरसों भर रही है, पुष्प पुलकित हुए, भँवरे गुँजयमान, नृत्य कर रहे हैं। […]

भजन/भावगीत

माँ महागौरी की महिमा

में खड़ी हूँ दर पे तेरे कर ले तू साज श्रृंगार। आज गौर वर्ण माँ गौरी चन्द्रदीप्ति भरा संसार।। माँ तेरी महिमा का गुणगान है हर द्वार। माँ के चरणों में समर्पित है आज सारा परिवार।। माँ की ममता से भरा ये नवरात्रि का त्योहार। आज अष्टमी तिथि को माँ गौरी का अद्भुत श्रृंगार।। शिव […]

कविता

देश प्रेम की अमृत वर्षा

अश्कों में वो देश प्रेम की अमृत वर्षा आज भी है, जो सुनी थी कहानी देश प्रेम की। नयनों में वो नमीं आज भी है, जो बही थी नदियाँ खून की।। हृदय के घावों से आज भी, वो अमृत वर्षा बहती है, जो देखी थी तलवारें वीरों की। वादियों के घने कुहरे में भी थी […]

कविता

उठे जब भी कलम मेरी

उठे जब भी कलम मेरी अधरों पर कुछ विचार लिए। चल पड़ती हूँ तब में कुछ नयें अंदाज लिए।। सोचती है इक नयीं पहेली अंगुलियों की पनाह में। लिखती है नयीं कहानी एकान्त में।। उठे जब भी कलम भावनाओं के सागर में। डूब जाती है ये मेरी कलम स्याही के समन्दर में।। कभी अश्कों की […]

कविता

छंदमुक्त कविता

यामिनी की इस प्रहरी में तुम्हारा अहसास महसूस हो रहा है। जैसे धीरे- धीरे चाँद ढल रहा है ।। कुछ मीठा -मीठा दद॔ सता रहा है,। यादों की गठरी लिए, मन व्यथित हो रहा है,,।। व्यथा गाँठ कुछ ऐसी है,। तुम बहुत दूर हो मेरी इस यात्रा में, भटक रही हूँ, इस रजनी में, तुम्हारी […]

कविता

अवनी

अवनी की इस चादर में , बैठी रही दिन रात में। शान्ति ढूंढ रही थी में, वसुंधरा की लहरों में।। झूम रही गगन तले में, वसंत की मधुरिमा में। भँवरों की मधुशाला में, गुलाब की पंखुडियों में।। अम्बर के तले अचला में, प्रकृति की सीमाओं में। आशाओं की वेदना में , मन की तरू लताओं […]

कविता

शिशिर ऋतु

ऋतुओं के ये मौसम कितने अद्भुत सौन्दर्य लिए प्रकृति को समर्पित हैं,। कभी हेमन्त कभी वसंत कभी वर्षा कभी शिशिर कहलाती हैं,,।। आसमां मेघों से भरा है पर्वत श्रृंखलाएँ बफ॔ से आछादित हैं,। कुछ पत्ते शाख से गिरने लगे हैं पेड़ पौधे वसंत की उमंग लिए हुए धरा को प्रफुल्लित करने के लिए तत्पर हैं,,।। […]

कविता

वादियों की छाँव में

वादियों की छाँव में जो वक्त गुजरा कितना शकून भरा था वो पेड़ो से भरा प्रकृति का किनारा,, कुछ पल ही सही कितना हसीन था वो नजारा, । जीने की राह जो भी हो मुद्दतों बाद इक साथ हसीन वादियों में जो ये वक्त गुजरा सदियों से था तुम्हारा इन्तजार जो ये वादियों ने हमें […]

कविता

ये किरणों का तेज

ये सूरज की किरणों का मुस्कुराना वो गुजरा हुआ जमाना,। एक एक किरण में है, वो अहसास पुराना, वो पहली किरण और आखिरी उम्मीद कितना हसीन था वो पल और वो जमाना। न सर्द हवाएँ महसूस होती थी न जेठ का महीना,, एक जैसा लगता था हर पल जैसे उगते हुए सूरज का मुस्कुराना कब […]

कविता

तरू तल में

बैठी हूँ तरू तल में अपनी क्लान्तियों को लिए हुए, देख रही हूँ चंचल मन तितलियों को लिए हुए,। झूम रही हैं लताएँ मद मस्त खिले हुए हैं फूल अपनी मुस्कान लिए हुए,,।। कितनी क्लान्तियों से भरा है ये मन, फिर भी आनन्दित हो रहा है, धरा के संग लताओ से आछादित है ये तरू […]