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  • वो चार लोग

    वो चार लोग

      माँ मुझे आज बताओ, वो चार लोग कहाँ है?? जिनके लिए तुम , बचपन से कहती आई । बाहर मेरे ज्यादा रहने से, तुम कहती थी हमेशा, कोई देख ले तो, चार लोग क्या कहेंगे??...

  • कलयुग

    कलयुग

    कलयुग जिंदगी की बड़ी गलती , सभी को अपना समझ , दिल से जुड़ जाते हो, उसके दर्द अपने समझ, मलहम लगाते हो।। यही संस्कार मिले बचपन से, करो भला तुम सभी का, कोई नही दुश्मन...

  • तुझमे समाना है

    तुझमे समाना है

    कान्हा की मुरली की धुन , उसमें हो गई मगन मैं , कान्हा तुम खोए हो मुरली में, मैं खोई खोई हूँ तुममें, कान्हा काश मैं होती मुरली, तो रहती संग तेरे ही हमेशा, कान्हा तेरी...

  • खेल

    खेल

    खेल खेल होते है प्यारे न्यारे , बचपन के थे वो साथी , कभी छुपते ,कभी खोजते, लंगड़ी टांग से पकड़ते । गिल्ली डंडा , पकड़म पकड़ाई, रात दिन खेलते साथी सभी, नही था तब भेद...


  • अधिकार

    अधिकार

    अधिकार नक्सली हमलें में एक नेता के साथ उसके चार सुरक्षा कर्मियों के मारे जाने के बाद नजदीक के गांव में ख़ौफ़ , दहशत का वातावरण हो गया है । आज चुनाव है राज्य में तो...


  • कौन बना मूर्ख

    कौन बना मूर्ख

    बहुत करीबी सहेलियां है रेहा , स्नेहा । दोनों खाना पीना , कॉलेज जाना साथ साथ करती है । कॉलेज में उनकी दोस्ती की मिसाल दी जाती सभी उनकी गहरी दोस्ती से चिढ़ते है । कोई...