Author :



  • लक्ष्मीबाई

    लक्ष्मीबाई

    ” तुम सब डरी हुई क्यों हो ……”? कोई जवाब नहीं सिर्फ खामोशी …… ” देखो , ये मेरा काम है ,सृष्टि को चलाने के लिए तुमको जाना होगा । मन मेरा भी नही तुम सबको...

  • सौदा

    सौदा

    सौदा ” यार… क्या पटाखा हैं वो…… ” ” अबे किसकी बात कर रहा हैं, साफ साफ बोल ” ” अरे.. वो जो नयी नयी आयी हैं……, क्या लगती है, पतली कमर, बलखाती चाल, और…. ”...

  • मेरे पापा

    मेरे पापा

    क्या कहूँ आपके लिए, शब्द कम हो गए आज, कभी आता गुस्सा है, कभी आता है प्यार, आज भी याद है सब कुछ, जो जो भी हुआ बचपन में, कितना कठोर रहते थे , कभी मदद...

  • दो बातें

    दो बातें

    “रानी तुझे कितनी बार कहा कि तु ज्यादा समय ऑनलाइन मत रहा कर । लोग इसका अर्थ गलत निकालते है। लोग तेरे लिए कितना कुछ बोल रहे है”।। “मां , तुम जानती हो कि मैं ऑनलाइन...

  • मन की रीत

    मन की रीत

    बात करते करते हमसे वो सहमति न होने पर बात से, अक्सर वो लड़ लेते थे हमसे, कहते हमेशा बात नही होगी अब, फिर भी रोज़ सवेरे उनका, आता सुप्रभात का संदेश, देख कर सन्देश उनका...

  • वो चार लोग

    वो चार लोग

      माँ मुझे आज बताओ, वो चार लोग कहाँ है?? जिनके लिए तुम , बचपन से कहती आई । बाहर मेरे ज्यादा रहने से, तुम कहती थी हमेशा, कोई देख ले तो, चार लोग क्या कहेंगे??...

  • कलयुग

    कलयुग

    कलयुग जिंदगी की बड़ी गलती , सभी को अपना समझ , दिल से जुड़ जाते हो, उसके दर्द अपने समझ, मलहम लगाते हो।। यही संस्कार मिले बचपन से, करो भला तुम सभी का, कोई नही दुश्मन...

  • तुझमे समाना है

    तुझमे समाना है

    कान्हा की मुरली की धुन , उसमें हो गई मगन मैं , कान्हा तुम खोए हो मुरली में, मैं खोई खोई हूँ तुममें, कान्हा काश मैं होती मुरली, तो रहती संग तेरे ही हमेशा, कान्हा तेरी...