कविता

छूट गया

जैसे जैसे कदम बढ़ते जाते है , छूट जाता है कुछ अपना , जो बसा होता है जहन में, उस मिट्टी की खुशबू है , सांसों में बसी धड़कन सी, नाम सुनते ही दिल तो, बेकाबू से हो जाता है मेरा, रोम रोम में बसी है , यादें ,महक वहां की , जिसको कैसे बिसरा […]

कविता

कभी कभी

  कभी कभी कभी- कभी हाँ जी कभी- कभी, हमको भी सोचना चाहिए खुद के लिए। क्यों हम औरतें कभी कभी, कुछ भी टाल देती है वो सब, जो पसन्द होता हमको भी , यह कह कर की अकेले है ।। करो वो सब काम भी रोज़, जो पसन्द हो तुमको हमेशा, खाओ अकेले भी […]

कहानी

शुक्रिया

शुक्रिया एक सुनसान जगह काली रात में दोनो साथ है । दोनों के मुहँ विपरीत दिशा में जैसे दोनों ही एक दूसरे को पसंद नहीं करते फिर भी साथ है । कहे तो साथ रहना मजबूरी है । एक व्यक्ति तन्द्रा भंग कर बोलता है ” तुम्हारा शुक्रिया मेरे जीवन में आने के लिए ” […]

लेख

2020

2020 जाने को तैयार खड़ा है तो नज़र डालते है पुरे साल पर कि क्या हुआ ? कारण इसके ,परिणाम क्या सीख दी इसने इसको जानना जरूरी है हमारे लिए । साल की शुरुआत हमेशा की तरह पुरे जोश, उत्साह ,संकल्पों के साथ हुई शुरू के दो महीने अच्छे निकले । मार्च आते आते कोरोना […]

कविता

साथ तुम्हारा

अच्छा लगता है तुम्हारा साथ, साथ न होते हो फिर भी साथ हो, शब्द मेरे होते नही है फिर भी, उनको सुनते लेते तुम कैसे हो , हर बात को नजाकत को तुम , जाने कैसे समझ जाते तुम हो, कैसा रिश्ता है यह हमारा तुम्हारा, जो नही होते हुए कुछ भी बहुत कुछ हो […]

लघुकथा

बेटी

अस्पताल से आते ही निढाल हो बैठ गया चेहरे पर शिकन ,चिंता दिख रही है। ” माँ , उसके ग्रुप का खून नही मिल रहा है और डॉक्टर बोल रहे खून बहुत बह गया है । उसकी माँ को बुला लेता हूँ कोरोना में किसका लेंगे ?? ” चल अभी ले चल मुझे अस्पताल “। […]

लघुकथा

तृप्ति

पंडित जी सुबह से आज बहुत खुश है ।उनके पुराने यजमान के यहां उनके बेटे ने यजमान के श्राद्ध के उपलक्ष में बड़ी पूजा रखी है और उनको बुलाया है। पंडित जी अपने दैनिक क्रिया से निवृत्त हो समय पर पहुंच जाते हैं ।आज के इस कलयुग में पुराना विशाल हवेली जैसा घर जिसके अंदर […]

कविता

रिश्ते

रिश्ता होने से रिश्ता नहीं बनता, रिश्ता निभाने से रिश्ता बनता है। “दिमाग” से बनाये हुए “रिश्ते” बाजार तक चलते है,,,! “और “दिल” से बनाये “रिश्ते” आखरी सांस तक चलते है,.. दिमाग से रिश्ते पल में बनते है , दिमागी रिश्तों में सिर्फ दिमाग , अपना काम करता रहता हैं दिमाग सिर्फ नफ़ा नुकसान , […]

संस्मरण

अनन्त यात्रा

बहुत खुश है वो यह जानकर कि दो नन्हे नन्हे फूल उसके अंदर पल रहे । जिसको सोच कर ही उसका मन बहुत खूब रोमांचित हो रहा है।वो हर पल उन्हीं के ख्यालों में खोई रहती और सोचती रहती उनके आने के बाद ऐसा करेगी वैसा करेगी । उनके साथ कैसे समय बिताएंगे उनके साथ […]

कविता

खो गए वो दिन

खो गए वो दिन कहाँ से कहाँ आ गए हम, खुद ही खो गए वो दिन कहाँ से कहाँ आ गए हम, खुद ही अपनों को खो दिया, वो दिन खो गए कहीं जब, हमारी दुनिया परिवार होते, दोस्त होते थे सब कुछ हमारे, खो गए वो दिन आधुनिकता में, पड़ोसी पड़ोसी करीबी होते थे, […]