हाइकु/सेदोका

हाइकु

  1. तू दूर नहीं मेरे पास है मां तू मुझमें कहीं. 2.शुक्रिया तेरा मेरे दोस्त तूने जीना सिखाया. 3.भूल न जाना मां की कुर्बानियां तू कर्ज़ चुकाना. 4.बतादे जरा तुझे लाऊं कहां से समझा ज़रा. 5.रख हौसला तिनके सहेज ले बना घोंसला    

हाइकु/सेदोका

कुछ हाइकू

{मेरी पहली कोशिश} 1.पेड़ लगाएं पेड़ों से है जीवन जीवन पाएं. 2.खो गई हूं मैं मुझे रास्ता दिखा दे ऐ मेरे खुदा. 3.रंग बिरंगी मेरे भैया की राखी मुझको भाती. 4. तुझे प्रणाम जग जननी नारी तू है महान. 5.हाइकु लाया गागर में सागर मन हर्षाया.

हाइकु/सेदोका

हायकू : कवि कविता

कवि हृदय रवि प्रकाश सम हुआ उजाला ============ देखि सुमन गति कलियाँ चली करने प्रेम =========== घिरी बदरी उमड़ि-उमड़ि के बरसे नीर ,,,, ========= कविता प्रिय प्रियतम संदेश है खुशहाली ============= प्रथम घटा घनघोर छोर न . कवि कविता ================ यथार्तबोध का नित गुंजन करे कविता ================= कवि हृदय तिमिर विनासक जग प्रकाश — राजकिशोर […]

हाइकु/सेदोका

हायकू : राधिका

भीगे नयन निहारि छटा कही राधिका बैन/ १ कान्हा के मन राधिका बसत हैं शृंगार बन …/ २ दिल तू राधा झूठा यह संसार लगत बाधा,,,३ रैन राधिका कहते नयनन दिल भाविका ४ श्याम राधिका नाम राधिका तेरा कान्हा प्रेमिका ५ नभ मे राधा तन मे राधेश्याम फिर क्यों व्याधा ,,,६ — राजकिशोर मिश्र [राज]

हाइकु/सेदोका

हाइकु

चली मथनी, हो गई एकत्रित, मक्खनी यादे चली मथनी, विष से नीला कंठ, अमृत बाँट चली मथनी, पिला रही गोपियाँ, छाछ कान्हा को चली मथनी, पहुँचाया कंस को, मक्खन कर चिनी दीवार, बं बांटा भगवान को, वाह रे बन्दे! ढही दीवार, उठ गए विवाद, घायल कौन?

हाइकु/सेदोका

चंद हाइकु कविताएँ

1 फूटने लगा ललछौंहा उजास पूरबी छोर । 2 प्यासा पादप ताके अंतिम क्षण बरसो मेघ । 3 खिला सुमन प्रेमी सूरज संग /गाल चूमती हवा चूमे किरण / हँसे किरण । 4 मसल नैन सुबह की चौखट जागती रैन । 5 मधुमालिती अलि भरें सागर मधु सागर । 6 कमल-कुञ्ज अलि मधु सौरभ प्रीत […]

हाइकु/सेदोका

माहिया

  काँटों में कलियाँ हैं बिटिया की बतियाँ मिसरी की डलियाँ हैं ।१ क्या थी कुव्वत मुझ में बाँट दिया रब ने माँ ! बिटिया में , तुझ में । २ क़िस्से दिन रातों के संग खिलौने हैं मीठी सी बातों के । ३ मिलने की आस बँधी झूम उठी बगिया फूलों से ख़ूब लदी […]

हाइकु/सेदोका

सेदोका (577 577 वर्ण)

(1) जेठ ज्यों चूल्हा तवा बनी धरती सूरज सम आँच मानव सिंकें उबलता पसीना हाँफती त्रस्त साँसें   (2) तुम चंद्रमा मेरा हृदय नभ बंधन ये अटूट है कोहिनूर जिंदगी की कमाई मुस्कानों की वजह   (3) होंठ लजाए छिप गयी मुस्कान दिल की ओट ले के खिला चेहरा गुलाबी हुआ समां बहका रोम-रोम   […]