आत्मानुशासन
सूरज की किरणेंधीरे-धीरे मन को छूतींधैर्य सिखातीं पत्थरों की राहकदम संभलकर चलते हैंसंतुलन सिखाती हवा की सरसराहटपत्तों को छूती धीरेशांति
Read Moreसूरज की किरणेंधीरे-धीरे मन को छूतींधैर्य सिखातीं पत्थरों की राहकदम संभलकर चलते हैंसंतुलन सिखाती हवा की सरसराहटपत्तों को छूती धीरेशांति
Read Moreधूप की धारकंधों पर गिरतीरास्ता तपे थका सफररेत से उभरतीनई उम्मीद धुंधले कदमकठिनाइयों में भीचाल न टूटे अंधेरी राततारों की
Read Moreसवेरे की धूपबच्चों की हँसी संगरंग भरती है नई उमंगेंआकाश की चौखट परउड़ान माँगें नन्हा कदमभविष्य की राहों मेंचमक बिखेरे
Read Moreपहली किरण में,सपनों का आलोक है,जीवन का आरंभ। मिट्टी की गंध,आशा का कोमल स्पर्श,नव सृजन जागा। पवन की सरगम,मन के
Read Moreराहें अनजानी,कदमों की धूल में भी,सपनों का मौसम। भोर की किरणें,थके दिल को छू जाएं,नयी उमंगें हैं। पथरीली डगर,फूलों से
Read Moreचाँद भी चुप था,रात की नमी में डूबी—यादें बेआवाज़। पेड़ की शाखों पर,साँसों का सन्नाटा था,हवा भी बोली नहीं। कदमों
Read Moreखामोश दरीचे,रोशनी के संग उड़ते,अधूरे सपने। हवा ने छू ली,पलकों की नींद गहरी,चाँद मुस्कुराए। झील की लहरें,तस्वीरें बोल उठीं,मन खो
Read Moreभीगे हैं लम्हे,यादों की चुप खामोशी—बरसात ठहरी। पलकों के कोने,मौन कहानी कहते—वक़्त मुसाफ़िर। टूटे हुए स्वप्न,राख़ में ढूँढे उजाले—सवेरा जागा।
Read Moreसड़कें सुनसान हैंअनकहे सवाल बिखरेनीर की बूँदें गिरें हवा भी पूछतीकौन सुनता आवाज़ यहाँपथिक ठिठकता सूरज ढलता हैछाया में छुपा
Read Moreचांद आधा सोया,सपनों की डोर,अब भी तनहा। नींद से दूर,आँखें जागतीं,मंज़िल पुकारे। क़दम थके हुए,दिल मगर बोले,रुकना मत अब। दीये
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