हाइकु/सेदोका

हाइकु/सेदोका

मेरी बेवक्त खांसी से नफ़रत है

सन्नाटा छा गयाबेचैनी की आहट मेंखांसी गूंज उठी। अँधेरी रातेंहर साँस में खिंच गईबेचैन लम्हें। धीमी रोशनी मेंटूटी हुई सांसें

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हाइकु/सेदोका

खामोशियां कुछ कहती हैं

पहाड़ी धुंध मेंछिपी अनकही बातेंसुनती है पगडंडी रात की आँचलधीमे स्वर में गातीटूटते तारे चाँद की लकीरजल में थरथरातीअनकहा सपना

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